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एक शताब्दी बाद फिर हुआ जैसाण का भाग्योदय, धन लक्ष्मी दे रही आशीर्वाद

-कोरोना ने दिया दर्द, फिर भी पर्यटन व खेती-किसानी लगा रही मरहम-सरहदी जिले में भूगर्भीय सम्पदा से अर्थव्यवस्था को दिया सम्बल

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एक शताब्दी बाद फिर हुआ जैसाण का भाग्योदय, धन लक्ष्मी दे रही आशीर्वाद

एक शताब्दी बाद फिर हुआ जैसाण का भाग्योदय, धन लक्ष्मी दे रही आशीर्वाद


जैसलमेर. पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले में एक शताब्दी बाद भाग्योदय हुआ है, मानो लक्ष्मी माता की कृपा बरस रही है। दुर्गम क्षेत्रों की फेहरिस्त में शामिल किए गए जैसाण में प्रतिकूल परिस्थितियां होने से कभी बन चुकी सिल्क रुट की पहचान अकाल व सूखे के स्थायी डेरे के तौर पर होने लगी थी। इससे पहले मध्ययुग में जैसलमेर सिल्क रुट के रूप में मशहूर था, क्योंकि यहीं से होकर तत्कालीन भारत का बेशकीमती सामान मध्य.पूर्व एशियाई मुल्कों तक पहुंचता था। करीब सौ वर्ष बाद फिर समय ने पलटा खाया है और धनलक्ष्मी की कृपा हुई है। पत्थर, पवन व पर्यटन से यह सुखद स्थिति बनी। हालाकि विगत दो वर्षों में कोरोना ने जैसाण के विकास की गति को रोक दिया, लेकिन अब यह काल खंड बुरा सपना मानकर उसे भुलाने का प्रयास कर रहे हैं। पर्यटन ने गति पकड़ ली है तो पर्यटन व खेती-किसानी भी विकास पथ पर जैसाण को अग्रसर करने को आतुर नजर आ रहे हैं। जानकार बताते थे कि करीब सौ वर्ष तक अमावस्या को आने वाली दिवाली केवल काली रात का ही अहसास कराती थी, अब उम्मीदों के बीच रोशनी से नहाते आसमान में विकास का साकार रूप देखा व महसूस किया जा सकता है। जगमगाते दीपकों के बीच मुस्कराते चेहरों को कोरोना के कहर बाद अब देखा जा सकता है। चाहे भू-जल आधारित खेती हो या पर्यटन, पत्थर उद्योग तथा पवन ऊर्जा से जुड़े व्यवसाय। अब धनलक्ष्मी की मौजूदगी हर क्षेत्र में देखी जा सकती है। स्वर्णिम आभा बिखरते जैसलमेर के पीले पत्थरों से स्थानीय तथा बाहरी लोगों को वार्षिक 100 करोड़ का व्यवसाय भी मिल रहा है। इंदिरा गांधी नहर के आगमन और नलकूप आधारित खेतीबाड़ी से किसानों का भाग्योदय हुआ। जैसलमेर के रिको औद्योगिक क्षेत्र में 25 गैंगसा इकाइयां व 100 ब्लॉक कटर इकाइयां हैं। जेठवाई में 250 ब्लॉक कटर संचालित किए जा रहे हैं। यहां सोनू गांव से निकलने वाली लाइम स्टोन की खदान की ढुलाई कर जैसलमेर का रेलवे स्टेशन पूरे जोधपुर मंडल के कमाऊपूत बन रेलवे स्टेशनों की फेहरिस्त में शामिल हो गया। सरहदी जिले में हवा की ताकत का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 3000 पवन चक्कियां बिजली का उत्पादन कर रही हैं। यहां की भीषण गर्मी भी सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ा रही है।

पर्यटन: 50 लाख से बढ़कर 1200 करोड़ का उछाल
कलात्मक सुदंरता व लोक संस्कृति के बूते सात समंदर पार से या फिर देश के कोने-कोने से पर्यटक यहां खींचे चले आते हैं और यहां आकर मरु संस्कृति के रंग में रंगने से खुद को नहीं रोक पाते। पर्यटन का टर्न ओवर 1200 करोड़ वार्षिक तक पहुंच गया हैं, जो कभी 50 लाख तक ही सिमटा हुआ था। करीब 40 वर्ष पहले सरहद के मरुस्थलीय क्षेत्रों में तेल और गैस की संभावनाओं की ओर केन्द्र सरकार का ध्यान गया। इसी समयावधि में पोकरण में पहली बार परमाणु परीक्षण हुए, इसके बाद जिज्ञासा के चलते देशी-विदेशी पावणों ने जैसाण की ओर कदम बढ़़ाए। यह क्रम आज तक बना हुआ है। वे दिन बीत गए जब सरहदी जिले से लोग अन्यत्र रोजगार की तलाश में जाते थे। अब यहां पर्यटन हो पत्थर या फिर पवन- सौर ऊर्जा के उत्पादन से जुड़े संयंत्रों में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं बाहर से आने वाले लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। पर्यटन उद्योग अब अपरिमित ऊंचाइयों को छू रहा है। देशी-विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैंं। जैसलमेर में सैकड़ों होटलेंए सम और खुहड़ी में 100 से ज्यादा रिसोट्र्स व कैम्प्स है। यहां 300 से ज्यादा रेस्टोरेंट्स, दर्जनों ट्रेवल एजेंसियां, सैकड़ों की तादाद में हैंडीक्राफ्ट संचालित हो रहे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से भी हजारों हाथों को रोजगार मिल रहा है।


अभी बढ़ेगी विकास की गति
जैसलमेर में विकास की सुभावनाएं अपार है। अब तक जो प्रगति दिखाई दे रही है, उसका लाभ भी यहां के लोगों को मिल रहा है। अभी भी विकास की कई संभावनाओं का दोहन करना बाकी है। पर्यटन नगरी के रूप में पहचान बना चुकी स्वर्णनगरी को निखारने और इसके विकास को लेकर आगामी समय में प्रयास किए जाएंगे।
-हरिवल्लभ कल्ला, सभापति, नगरपरिषद जैसलमेर