
जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के किसानों के लिए तीन वर्ष पूर्व कृषि उपज मंडी की घोषणा तो की गई, लेकिन बजट का आवंटन नहीं किए जाने के कारण अभी तक मंडी शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में किसानों को घोषणा का लाभ नहीं मिल रहा है। गौरतलब है कि इंदिरा गांधी नहर के आने और क्षेत्र के कई गांवों में भू-गर्भ में मीठे जल के भंडार मिलने से किसानों को जीवनदान मिला। नहरी क्षेत्र के अलावा अन्य जगहों पर भी नलकूपों के माध्यम से खेती होती हैै। कई किसान आज भी बारिश की खेती पर ही निर्भर है। जैसलमेर व पोकरण क्षेत्र के किसान वर्ष में दो बार रबी व खरीफ की फसल का उत्पादन करते है, लेकिन पोकरण क्षेत्र में फसल बेचने की सरकारी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। इसके साथ ही किसानों को व्यापारियों को औने-पौने दामों में अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से तीन वर्ष पूर्व कृषि मंडी की घोषणा की गई थी, लेकिन अभी तक मंडी को लेकर जमीन आवंटन के अलावा कोई कवायद नहीं हो पाई है। ऐसे में किसान आज भी बाजार में कम दामों में अपनी फसल बेचने को मजबूर है।
क्षेत्र के किसानों की ओर से लंबे समय से पोकरण में कृषि उपज मंडी की मांग की जा रही थी। वर्ष 2021-22 के बजट के दौरान राज्य सरकार की ओर से कृषि उपज मंडी खोलने की घोषणा के बाद कस्बे से रामदेवरा जाने वाले मार्ग पर गोमट गांव के पास 50 बीघा भूमि भी आवंटित की गई।
सरकार की बजट घोषणा के बाद प्रशासन व कृषि विभाग की ओर से भूमि आवंटन को लेकर तैयारी शुरू की गई। प्रशासन की ओर से रामदेवरा रोड पर 50 बीघा भूमि आवंटित भी कर दी गई, लेकिन बजट अभी तक नहीं मिला है। जिसके कारण अभी तक भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में किसानों को इस घोषणा का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है और आज भी फसल विक्रय को लेकर परेशानी हो रही है।
पोकरण में कृषि उपज मंडी नहीं है। बाजार में सही दाम नहीं मिल पाता है और कृषि मंडी में फसल विक्रय के लिए अन्यंत्र जाना पड़ता है। जिससे परेशानी हो रही है।
सरकार ने तीन वर्ष पूर्व मंडी की घोषणा की थी। जिसकी जमीन भी आवंटित हो गई, लेकिन बजट नहीं मिलने से मंडी चालू नहीं हो पाई है। अब यदि सरकार बजट स्वीकृत कर मंडी को शीघ्र चालू करे तो किसानों को राहत मिलेगी।
Published on:
12 Jul 2024 11:58 pm
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