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मरुस्थल में थमी एड्स की रफ्तार: जागरुकता ने बदली तस्वीर

जैसलमेर जिले में कभी तेजी से पांव पसारने वाले एड्स पर अब नियंत्रण में होता दिख रहा है।

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जैसलमेर जिले में कभी तेजी से पांव पसारने वाले एड्स पर अब नियंत्रण में होता दिख रहा है। सरकारी और गैर-सरकारी प्रयासों के साथ जिला मुख्यालय पर उपचार की सुविधा ने इस घातक बीमारी के मामलों में ठहराव ला दिया है। एड्स का आमूल उपचार भले ही चिकित्सा विज्ञान के लिए अभी भी चुनौती बना हुआ है, लेकिन बचाव और जागरूकता से जिले में राहतकारी स्थिति बनी है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में एचआइवी जांच और उपचार की सुविधाओं के साथ-साथ मरीजों की काउंसलिंग भी की जाती है। हकीकत यह है कि एक्वायर्ड इम्युनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स) का आमूल उपचार देश-दुनिया में चिकित्सा विज्ञानियों के लिए अब तक अनसुलझी पहेली ही बना हुआ है। ऐसे में इससे बचाव को ही सर्वश्रेष्ठ उपचार माना गया। सूत्रों के अनुसार गत वित्तीय वर्ष तक जैसलमेर जिले में एड्स रोगियों की संख्या करीब 200 थी। इस वर्ष करीब 100 मरीज पंजीकृत है।

रेगिस्तान में एड्स फैलने की कहानी

-पर्यटन के चलते जैसलमेर में एड्स की शुरुआत 1990 के दशक में हुई।

-कैमल सफारी से जुड़े लोग विदेशी पर्यटकों के संपर्क में आने से संक्रमित हुए।

  • रोजगार के लिए बाहर जाने वाले जिलेवासियों ने भी इसे फैलाने का काम किया।
  • राजस्थान विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में ऊंट सवारों में तेजी से एचआइवी संक्रमण की पुष्टि हुई।
  • संक्रमित पुरुषों के कारण कई महिलाएं भी एचआइवी का शिकार बनीं।

राहत : उपचार और जागरूकता का असर

  • जिला अस्पताल में एचआइवी जांच की नि:शुल्क सुविधा।
  • पॉजिटिव मामलों को जोधपुर रेफर कर सीडी-4 जांच और उपचार शुरू किया जाता है।

-सरकार ने जांच से लेकर दवाइयों तक की नि:शुल्क व्यवस्था की है।

-एचआइवी संक्रमित की पहचान गोपनीय रखने के विशेष उपाय अपनाए गए हैं।

एड्स से जुड़ी अहम जानकारियां

1981: पहला एड्स रोगी दुनिया में चिह्नित।

1990: जैसलमेर में एड्स ने दी दस्तक।

100: मौजूदा समय में जिले में उपचाराधीन मरीज।

जांच उपलब्ध, कर रहे काउंसलिंग

एचआइवी मरीजों के लिए जांच और उपचार की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हम मरीजों की काउंसलिंग भी कर रहे हैं।

— डॉ. चंदनसिंह तंवर, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, राजकीय जवाहिर चिकित्सालय, जैसलमेर