
अपने आप में अजूबा हैं जैसलमेर के सभी पर्यटन स्थल
जैसलमेर में एक से बढकऱ एक ऐसे दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थान हैं, जिनका विराट स्वरूप, खूबसूरती, कलात्मकता और विशद् इतिहास सैलानियों को अपने आकर्षण के जाल में बांध लेते हैं। करीब नौ सौ वर्ष प्राचीन जैसलमेर शहर और उससे पहले इस रियासत का इतिहास सैलानियों को अतीत की स्मृतियों में गोते लगाने के लिए विवश कर देते हैं। प्रमुख स्थानों के रूप में इनका दीदार करना प्रत्येक देशी-विदेशी सैलानी की चाहत होती है -
अजेय सोनार किला
जैसलमेर स्थित 99वें बुर्जों वाले सोनार दुर्ग का आकर्षण सदियों बाद भी जवां है। दुर्ग में कलात्मक जैन मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर, रत्नेश्वर महादेव, सूर्यदेव के बड़े-बड़े सैकड़ों साल प्राचीन मंदिर हैं तो राजसी वैभव के जीवंत नमूने के तौर पर राज महल को देखकर सैलानी अचम्भे में पड़ जाते हैं। यहां करीब तीन हजार लोग निवास करते हैं और इतनी बड़ी आबादी वाला अन्य दुर्ग मौजूदा दौर में खोजना मुश्किल है। दुर्ग में सैलानियों के लिए अनेक होटल्स व गेस्ट हाउस हैं। जहां ठहरने के प्रति सैलानियों में खास आकर्षण देखा जा रहा है।
रेगिस्तान में नखलिस्तान : गड़ीसर तालाब
स्वर्णनगरी आने वाले सैलानियों के लिए गड़ीसर सरोवर हमेशा से आनंद और शांति के पल बिताने का मनपसंद स्थल है। रेगिस्तानी शहर जैसलमेर में सैलानियों के लिए करीब 600 साल पुराना गड़ीसर तालाब अपने आप में अजूबे के समान है। ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर की कलात्मक बंगलियां देशी-विदेशी सैलानियों को हमेशा से लुभाती रही हैं। देशी-विदेशी पर्यटक कलात्मकता से परिपूर्ण इस तालाब को देखते ही मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। तालाब में मौजूद अथाह जलराशि, विशाल प्रवेश द्वार टीलों की प्रोल, मध्य में बनी जालीदार पत्थर की बड़ी-बड़ी बंगलियां और छतरियां इसके आकर्षण को चिरयुवा बनाते हैं।
कलात्मकता से भरपूर पटवों की हवेली
जैसलमेर की पटवा हवेलियों का कलात्मक सौन्दर्य देखने के लिए साल भर में लाखों की तादाद में देशी-विदेशी सैलानी जुटते हैं। स्वर्णनगरी को पर्यटन मानचित्र पर उभारने में कलात्मक पटवा हवेलियों का योगदान बहुत बड़ा है। पांच हवेलियों के समूह में बनी हवेलियां दूर से ही रिझाती हैं। वर्ष 1976 में ऐतिहासिक हवेलियों का अधिग्रहण किया गया था। उत्कृष्ट भवन निर्माण कला, बारीक नक्काशी कार्य और पत्थर पर जालीदार खिड़कियों व झरोखों का काम इतने महीने ढंग से किया गया है, मानो यह लकड़ी हो।
रोमांचित करता है कुलधरा
जैसलमेर से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे कुलधरा गांव सैकड़ों साल पहले वैज्ञानिक तथा वास्तु नियमों के आधार पर बसाया गया था। इसे देखकर पालीवाल ब्राह्मण समाज की विकसित सोच और समझ पर भी अचम्भा किए बिना नहीं रहा जा सकता। करीब दो सौ साल पहले वीरान हुए इस गांव में फिर कोई स्थायी रूप से बस नहीं सका। गौरतलब है कि पालीवाल ब्राह्मण 13वीं सदी में राजस्थान के पाली जिले से विस्थापित होकर जैसलमेर आए थे। जल संरक्षण की मिसाल पालीवाल समाज बेहद समृद्ध किसान और व्यापारी थे। उनके बाहुल्य वाले 84 गांवों में कुएं, बावडिय़ां, तालाब और खड़ीन साल भर तृप्त रहते थे।
सम-खुहड़ी के धोरों का जादू
जिला मुख्यालय से महज 42 किलोमीटर की दूरी पर सम क्षेत्र में रेत के मखमली धोरे दूर-दूर तक फैले हैं और इनका क्रेज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। इन धोरों पर ऊंट की सवारी व जीप सफारी के अलावा पैरासेलिंग, पैरामोटरिंग, क्वाड बाइक का भ्रमण पर्यटकों को खूब रास आता है। धोरों के बीच बने आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त रिसोट्र्स में रहने का अपना मजा है। रेगिस्तान के जहाज की पीठ पर सवार होकर भ्रमण करने का सैलानी खूब लुत्फ उठाते हैं। यहां रिसोट्र्स में प्रतिदिन शाम के समय राजस्थानी लोकगीत-संगीत व नृत्य की त्रिवेणी बहती है। ऐसे ही जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर खुहड़ी गांव के रेतीले धोरे सैलानियों का मन मोह लेते हैं। वहां भी रिसोर्ट व कैम्प बने हुए हैं।
शानदार है वार म्यूजियम
जैसलमेर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर जोधपुर-बीकानेर मार्ग पर भारतीय सेना की ओर से निर्मित युद्ध संग्रहालय यानी वार म्यूजियम विगत वर्षों के दौरान पर्यटकों का चहेता पर्यटन स्थल बन रहा है। सैलानी मार्ग में रुककर इसका दीदार करना नहीं भूलते। संग्रहालय में आगंतुकों के लिए यहां एक छोटा सिनेमा, कैंटीन और सुव्यवस्थित दुकानें लगाई गई हैं। इसके अलावा शीतलता का अहसास कराने वाले फाउंटेन और हरी-भरी दूब से आच्छादित यह पूरा साफ-सुथरा परिसर पहली नजर में दर्शकों का मन मोह लेता है। म्यूजियम में पाकिस्तान के खिलाफ वर्ष 1965 और 1971 के युद्धों में प्राप्त विजय की गाथा का जीवंत प्रदर्शन किया गया है।
चमत्कारिक तनोटराय मंदिर
जैसलमेर भ्रमण पर आने वाले सैलानियों का एक बड़ा हिस्सा सीमा क्षेत्र में अवस्थित तनोटराय देवी के मंदिर में दर्शन करने अवश्य पहुंचता है। जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित तनोटराय मंदिर में पाकिस्तानी सेना की ओर से युद्ध के दौरान गिराए गए जिंदा बमों को भी रखा गया है, जो माना जाता है कि देवी के चमत्कार की वजह से फट नहीं पाए। इन सबके अलावा बड़ाबाग और व्यास छतरी सनसेट पॉइंट की कलात्मक छतरियां, लौंगेवाला, बबलियानवाला बॉर्डर पोस्ट, लौद्रवा के बेहतरीन कलाकारी वाले जैन मंदिर, जैसलमेर स्थित सालमसिंह की हवेली, पोकरण व रामदेवरा के कलात्मक स्थान स्वर्णनगरी भ्रमण पर आने वाले सैलानियों का बाहें पसार कर स्वागत करते हैं।
Published on:
03 Feb 2024 08:03 pm
बड़ी खबरें
View Allजैसलमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
