
पोकरण के भादरिया में स्थित है एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय
पोकरण. थार का नाम आता है, तो स्वत: ही दिमाग में रेगिस्तान व रेत के टीलों का दृश्य बनने लगता है, लेकिन किसी ने सोचा होगा कि इन रेतीले धोरों के बीच एक ऐसी भी जगह है, जहां ज्ञान का अथाह भंडार भरा पड़ा है। मरुप्रदेश के तपते रेतीले धोरों के बीच भारत-पाक सीमा पर स्थित सरहदी जिला जैसलमेर वैसे तो विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान रखता है। इसी जिले में जैसलमेर-पोकरण के बीच प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल भादरियाराय माता मंदिर स्थित है। यहां जगदम्बा सेवा समिति ने एक विशाल पुस्तकालय की नींव रखी है। जिसे विश्व स्तर पर एक अलग पहचान बनाने को लेकर यह समिति विगत कई वर्षों से प्रयासरत है। इसके साथ ही समिति की ओर से समय-समय पर लोकहित व जनकल्याण के कार्य भी करवाए जा रहे है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इस समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समिति ने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं व लोगों के पढऩे की प्यास को एक ही जगह पर बुझाने के उद्देश्य को लेकर विश्व के समस्त पुस्तकालयों में मिलने वाली पुस्तकों को एक ही स्थान पर जमा करने व लोगों को इसके लिए अन्यंत्र भटकना नहीं पड़े, इसकेे लिए कार्य किया है। यहां पुस्तकों का संग्रह कर दुनिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय स्थापित करने का सपना संजोया है, जो इस जिले के लिए किसी गर्व से कम नहीं है। इसी सपने को साकार करने के लिए समिति की ओर से देश की सबसे बड़ी व विश्व में अपना उच्च स्थान रखने वाले एक ऐसे पुस्तकालय की नींव रखकर एक अनूठी पहल की है।
39 वर्ष पूर्व रखी थी नींव
सन् 1981 में जगदम्बा सेवा समिति के संस्थापक व क्षेत्र के प्रसिद्ध संत हरवंशसिंह निर्मल उर्फ भादरिया महाराज ने भादरिया मंदिर में करवाए गए विशाल धर्मशाला व अन्य निर्माण के साथ एक पुस्तकालय की भी नींव रखी थी। यही पुस्तकालय आज एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक है। यहां वर्तमान में एक करोड़ से अधिक कीमत की विभिन्न तरह की साहित्यक, ऐतिहासिक, ज्ञानवद्र्धक व विधि से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध है तथा पुस्तकों के संग्रह का कार्य निरंतर रूप से आज भी जारी है। पुस्कालय के लिए यहां पर दो विशाल भवन बनाए गए है। एक में पुस्तकों का अध्ययन करने के लिए व्यवस्था की गई है। दूसरे भवन में सैकड़ों की संख्या में निर्मित अलमारियों में उन्हें संग्रहित कर रखा गया है। यहां बने अध्ययन केन्द्र में एक साथ सैकड़ों लोग एक ही समय में बैठकर इन पुस्तकों का अध्ययन कर सकते है।
इन पुस्तकों का किया गया है संग्रह
यहां समिति देश के जाने माने साहित्यकारों की रचनाओं के साथ ही विश्व के दुर्लभ साहित्य को भी एकत्रित करने के प्रयास में जुटी है। इस पुस्तकालय में विश्व के कुल 11 धर्मों में से सात धर्मों का सम्पूर्ण साहित्य उपलब्ध है। कानून की आज तक प्रकाशित सभी पुस्तकें, वेदों की सम्पूर्ण शृंखलाएं, भारत का संविधान, विश्व का संविधान, जर्मन लेखक एफ मैक्स मुलर की रचनाएं, पुराण, एन साइक्लोपिडिया की पुस्तकें, आयुर्वेद, इतिहास, स्मृतियां, उपनिषेद, देश के सभी प्रधानमंत्रियों के भाषण विभिन्न शोध की पुस्तकों सहित हजारों तरह की पुस्तकें यहां उपलब्ध है।
पत्रिका के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी की पुस्तकें भी संग्रहित
पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी की लिखित ग्रंथ व पुस्तकें भी यहां संग्रहित की गई है। हाल ही में गुलाब कोठारी की लिखित अक्षर यात्रा भाग प्रथम व द्वितीय तथा संवाद उपनिषद का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से विमोचन किया गया था। इन पुस्तकों को भी इस पुस्तकालय में रखवाया गया है, ताकि यहां आने वाले लोग अपना ज्ञानवर्धन कर सके।
यह है व्यवस्था
- समिति की ओर से यहां पुस्तकों की देखरेख व संरक्षण के लिए करीब 562 अलमारियां बनाई गई है, जिसमें लाखों पुस्तकें रखी गई है।
- यहां 16 हजार फीट की रेंक बनाई गई है। इसी तरह दुर्लभ साहित्य की माइक्रो सीडी बनाने व उन्हें रखने के लिए यहां पर अठारह कमरों का भी निर्माण करवाया गया है।
- यहां बनी चार गैलेरियों में से दो करीब 275 फीट व दो करीब 370 फीट लम्बी है।
- पुस्तकालय में अध्ययन के लिए अलग से 60 गुणा 365 फीट के एक विशाल हॉल का निर्माण करवाया गया है। जिसमें चार हजार लोग एक साथ बैठ सकते है।
Published on:
15 Oct 2020 12:00 pm
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