
जैसलमेर जिले भर में बुधवार को बछ बारस का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। इस अवसर पर गाय और बछड़े को बाजरी के आटे के लड्डुओं का भोग लगाया गया। नवविवाहित जोड़ों ने भी गाय-बछड़े का पूजन किया और अपने घरों में बछ बारस की कथा पढ़ी और सुनी। सुबह से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के गली-मोहल्लों तथा मार्गों पर महिलाओं की रेलमपेल देखने को मिली। महिलाएं पूजा की थाली सजाकर घरों से निकल पड़ी और बाड़ों व गोशालाओं में जाकर गाय-बछड़े की पूजा-अर्चना की। ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-अर्चना करते हुए महिलाओं ने संतान की सलामती और लंबी उम्र की कामना की। बछ बारस के दिन पुत्र वाली माताओं ने अपने बेटों के अक्षत तिलक लगा कर नजर उतारी और प्रसाद खिलाकर उनके दीर्घायु होने की प्रार्थना की। इस दिन घरों में केवल बाजरी और ज्वार की रोटी, बकरी और भैंस के दूध तथा उनके घी का ही प्रयोग किया गया। महिलाओं ने गेहूं से बनी खाद्य सामग्री और लोहे से कटी हुई भोजन सामग्री का उपयोग नहीं किया। परिवार के सदस्य बाजरी-ज्वार की रोटी के साथ बैरवा और चावल का आहार करते रहे।शाम को गायों के लौटने से पूर्व और सूर्यास्त से पहले महिलाओं ने भोजन किया और दिनभर की परंपरागत रस्में पूरी की।
Updated on:
20 Aug 2025 08:54 pm
Published on:
20 Aug 2025 08:53 pm
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