
बदहाल चिकित्सा व्यवस्था, ग्रामीण परेशान
नोख. ग्राम पंचायत बोड़ाना मुख्यालय के वाशिंदे आजादी के सात दशक बाद भी चिकित्सा व्यवस्था को लेकर परेशान है। यहां सरकारी व विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि लोग भी सरकारी व्यवस्था की बजाय निजी व्यवस्था पर निर्भर होते जा रहे है। जिसका खामियाजा आमजन को कोरोना महामारी में भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को एक महिला की मौत हो गई। इससे पूर्व भी कई लोग अपनी जान गंवा चुके है। बोड़ाना में चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर एक उपस्वास्थ्य केन्द्र स्थित है। भवन पूरी तरह से जर्जर पड़ा है। जिसके कारण एएनएम को भी गांव में अन्य भवन में उपस्वास्थ्य केन्द्र का संचालन करना पड़ रहा है। भवन पूरी तरह से जर्जर होकर ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गया है, लेकिन इसकी सुध नहीं ली जा रही है। सारसंभाल के अभाव में भवन में चमगादड़ों का डेरा जमा हुआ है। केन्द्र में रखे धूल से भरे दो बैड व उसके गद्दे विभागीय उदासीनता का परिचय दे रहे है।
जागरुकता की कमी
बोड़ाना में कोरोना के प्रति ग्रामीणों में जागरुकता की कमी होने से परेशानी आ रही है। यहां के लोग बहुत ही कम संख्या में जांच के लिए आ रहे है। जिससे समय रहते कोरोना का उपचार नहीं हो पाता है। हालांकि शिक्षा विभाग के साथ-साथ एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा सहयोगिनियों के सहयोग से तीन बार सर्वे हो चुके हैं और 62 संदिग्धों को मेडिकल किट भी वितरित किए जा चुके है, लेकिन भय के कारण लोग खुलकर कोरोना के लक्षण भी नहीं बता रहे है।
नहीं है जांच की सुविधा
बोड़ाना में कोरोना जांच व सैम्पल की कोई सुविधा नहीं है। इसके लिए ग्रामीणों को नोख के राजकीय अस्पताल जाना पड़ता है। जागरुकता को लेकर रथ यात्रा निकाली गई है तथा सरकार की गाइडलाइन को लेकर भी जानकारी दी गई है।
- नरेन्द्रसिंह तंवर, सरपंच ग्राम पंचायत बोड़ाना।
Published on:
27 May 2021 07:57 pm
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