
ब्रह्मसर दादावाड़ी में दादा गुरुदेव की बड़ी पूजा सम्पन्न
जैसलमेर. कुशल दर्शन मित्र मण्डल बाड़मेर व जिन कुशल युवा मंडल जैसलमेर की ओर से पूर्णिमा पर विशेष गुरू दर्शन यात्रा का आयोजन किया गया। कुशल दर्शन मित्र मण्डल के राजू वडेरा व रमेश कानासर ने बताया कि ब्रह्मसर तीर्थोद्वारक मनोज्ञसूरीश्वर की प्रेरणा से 15 वर्ष पहले शुरू हुई यात्रा शनिवार को चैत्र पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 176वीं यात्रा बाड़मेर से लौद्रवपुर, ब्रह्मसर तीर्थ की यात्रा कराई। कानासर ने बताया कि यात्रा संघ सैकड़ों गुरुभक्तों के साथ सैकड़ों यात्री स्थानीय आराधना भवन बाड़मेर से रवाना होकर प्रात: 6 बजे लौद्रवपुर तीर्थ पहुंचा, जहां पाश्र्वनाथ दादा के दर्शन कर पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर लौद्रवा पाश्र्वनाथ दादा के पक्षाल व केशर पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने पूजन में पाश्र्वनाथ दादा के भजनों की प्रस्तुतियां दी। पूजन के पश्चात संघ लौद्रवपुर से ब्रह्मसर की ओर प्रस्थान कर गया। कुशल युवा मण्डल के सरूपचन्द रणधा व सरूप बागचार ने बताया कि ब्रह्मसर दादावाडी प्रांगण में दादा जिन कुशलसूरी गुरूदेव के चरण पादुकाओं के आगेे पूर्णिमा को गुरु के नव अंगों की केशर से पूजा की गई व दोपहर में गुरु के चरणों मे अष्ट प्रकारी महापूजन का आयोजन किया गया। प्रकाश पारख एंड पार्टी की ओर से भजनों की शानदार प्रस्तुतियां दी गई। गुरुभक्त रमेश कानासर, कैलाश सेठिया, दिनेश लूणिया की ओर से प्रस्तुत भजन पलके ही पलके बिछाएंगे, जिस प्यारे दादा घर आएंगे, गुरूवर तेरे चरणों की थोडी धूल जो मिल जाए एवं पूनम का है दिन दादा आज थाने आणो है... भजन पर भक्त जमकर झूमे। बागचार ने बताया कि महापूजन के बाद महा आरती का आयोजन किया गया। पूर्णिमा के अवसर पर विमलनाथ भगवान की आरती व भगवान व दादा गुरुदेव का मंगल दीपक आसुलाल लक्ष्मणदास लूणिया बाड़मेर दादा गुरुदेव की आरती रतनलाल शिवलालचंद मालू रंगाला वाले, भेरूजी की आरती आसुलाल लक्ष्मणदास लूणिया बाड़मेर वाले हस्ते दीनदयाल लूणिय की ओर से लिया गया। पूनम के सुबह के नाश्ते व दोपहर नवकारसी का लाभ कुशल दर्शन मित्र मंडल ब्रह्मसर गु्रप बाड़मेर व बडी पूजा का लाभ शंकरलाल केशरीमल बोथरा परिवार बाड़मेर व आसुलाल लक्ष्मणदास लूणिया परिवार बाड़मेर व शाम को नवकारसी का लाभ जिन कुशल युवा मंडल जैसलमेर की ओर से लिया गया। जिनका ट्रस्ट मंडल व गु्रप ने आभार जताया। शाम को तीर्थकर विमलनाथ भगवान और दादा जिनकुशल गुरूदेव की आंगी रचाई गई तथा गुरूदेव का सामूहिक इक्कतीसा तीसा का पाठ का आयोजन हुआ।
Published on:
17 Apr 2022 09:03 pm
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