12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

जैसलमेर स्थापना दिवस – कितना बदल गया जैसाण, पत्थरों ने दिलाई पहचान

जैसलमेर - आज के जैसलमेर को देखकर सहसा विश्वास नहीं होता कि महज चार दशक पहले तक थार रेगिस्तान की गोद में बसा यह नगर रेत से अटा हुआ था।

2 min read
Google source verification
जैसलमेर स्थापना दिवस - कितना बदल गया जैसाण, पत्थरों ने दिलाई पहचान

जैसलमेर स्थापना दिवस - कितना बदल गया जैसाण, पत्थरों ने दिलाई पहचान

जैसलमेर - आज के जैसलमेर को देखकर सहसा विश्वास नहीं होता कि महज चार दशक पहले तक थार रेगिस्तान की गोद में बसा यह नगर रेत से अटा हुआ था। जहां आमजन को दैनिक जीवन की आधारभूत सुविधाएं तक सलीके से मुहैया नही ं थी। थोड़ी बहुत संख्या में विदेशी सैलानी यहां घूमने आते थे। घरेलू सैलानियों को इस शहर की विशेषताओं के बारे में पता तक नहीं था। आज सितारा होटलों की पूरी शृंखला है। दो सौ से अधिक छोटी और मझोली होटलें तथा हजारों की संख्या में सैलानियों की सुविधा के लिए वाहनों की उपलब्धता है। लंबी चौड़ी सडक़ें हैं और रोजमर्रा के जीवन की तमाम सुख सुविधाएं इफरात में मौजूद है, जिन पर किसी भी अन्य बड़े शहर के बाशिंदों को रस्क हो सकता है। आज यह शहर ट्रेन के माध्यम से राज्य राजधानी जयपुर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुम्बई, कोलकाता, काठगोदाम तक सीधे तौर पर जुड़ गया है।जोधपुर और बीकानेर जैसे पड़ोसी शहर के लिए यातायात के ट्रेन, बस के ढेरों विकल्प उपलब्ध हो गए हैं।तीन वर्षपहले कोई सौ करोड़ रुपए की लागत से सिविल एयरपोर्ट भी यहां बनकर तैयार है। आने वाले समय में जैसलमेर नियमित हवाई सेवा से जुडऩे के लिए तैयार है।
पर्यटन ने दिया हजारों को रोजगार
जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय का विस्तार 1980 के दशक में प्रारंभ हुआ। स्थानीय ‘टूरिस्ट ब ंगला’ जो राजस्थान पर्यटन विकास निगम द्वारा स्थापित किया गया, आज मूमल होटल कहलाता है। इसके बाद जैसलमेर में जैसे पर्यटन विकास का तूफान आ गया। 198 2 में यहंा कुल 10 होटल थे जो 198 6 में बढकऱ 29 हुए, 1989 में 35, 1993 में 68, 1995 में 83, 1999 में 94, 2001 में 121 और आज 250 से भी ज्यादा होटल है। जैसे होटलें बढ़ी, उसी अनुपात में रेस्टोरे ंटï्स, ट्रेवल एजेंसियां और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बढ़े। आज प्रतिवर्ष लाखों देसी- विदेशी सैलानियों के समूह दर्शनीय स्थलों के भ्रमण के लिए आते हैं। सैलानियों के लिए कई हैण्डीक्राट और पुराने सामान की दुकानें खुलने से हजारों लोगो ं को रोजगार मिला है। गांवों में सम और खुहड़ी के रेत के टीलों का सैलानियों के सैर-सपाटे का प्रमुख स्थल बना दिया है। ऊंटों के उपयोग से कैमल सफारी चलन में आई।
पत्थरों ने दिलाई पहचान
स्वर्णमयी आभा के कारण जैसलमेर के पीले पत्थर की चमक अब विदेशों तक जा पहुंची है। देश के विभिन्न स्थानों पर यह पत्थर काम में लिया जा रहा है वहीं चीन, कनाडा, दोहा, कतर, बांग्लादेश, स्पेन, आस्ट्रेलिया, यूके और संयुक्त अरब अमीरात सहित अरब देशों में भी जैसलमेरी पत्थर भवन निर्माणों में पसंद किया जा रहा है। सोनार दुर्ग की सुनहरी आभा और पीले पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के कार्य को देखने के लिए सात समन्दर पार से हजारों सैलानी प्रति वर्ष यहां पहुंचते हैं, वहीं अब तो यह शहर देशी सैलानियों के लिए भी प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है। सोनार किले की चमकती आभा सैलानियों को जैसलमेर की ओर खींच लाती है। दुर्ग के अलावा यहां के पीले पत्थरों से बनी कलात्मक हवेलियां और प्रमुख ऐतिहासिक स्थल सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं।