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सिटी टॉकिंग पॉइंट: खुले सीवरेज बने खतरा, नहीं टूट रही जिम्मेदारों की तंद्रा, विद्यार्थी, राहगीर व पर्यटक भी भयभीत

पर्यटन नगरी का चमकता चेहरा इन दिनों एक गंभीर समस्या के साए में है। शहर के महज तीन दायरे में करीब दो दर्जन खुले सीवरेज के गड्ढे खतरे की घंटी बने हुए हैं।

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पर्यटन नगरी का चमकता चेहरा इन दिनों एक गंभीर समस्या के साए में है। शहर के महज तीन दायरे में करीब दो दर्जन खुले सीवरेज के गड्ढे खतरे की घंटी बने हुए हैं। हर दिन 40 हजार लोग भय के साये में रास्ता पार करते हैं। हालात ऐसे हैं कि स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि यहां आने वाले पर्यटक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

बारिश के मौसम व रात के अंधेरे में सबसे अधिक सताती है हादसों की आशंका

सबसे चिंताजनक बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की अनदेखी जारी है। दिन में किसी तरह लोग बचते-बचाते निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय और बारिश में स्थिति और भयावह हो जाती है। शहर के इन मुख्य रास्तों पर हर दिन सैकड़ों वाहन और राहगीर गुजरते हैं। जरा सी चूक से बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा

-अमरसागर प्रोल के पास सीवरेज का खुला गड्ढ़ा
-मंगलसिंह पार्क के समीप क्षतिग्रस्त सीवरेज के जर्ज़र ढक्कन

-गर्ल्स स्कूल मार्ग पर खुले गड्ढ़े छात्राओं के लिए बड़ा जोखिम
रात में 'ब्लाइंड स्पॉट' बनते गड्ढे

शाम ढलते ही खुले गड्ढे ब्लाइंड स्पॉट बन जाते हैं। कभी-भार स्ट्रीट लाइट बंद होने और चेतावनी संकेतों का अभाव स्थिति को और खतरनाक बना देता है। कई स्थानों पर लोग खुद ही पत्थर या लकड़ी रखकर अस्थायी समाधान कर रहे हैं।

रोज लगता है डर

इन जर्जर सीवरेज के गड्ढ़ों के पास से गुजरने के दौरान हर दिन डर लगा रहता है कि कोई बच्चा या बुजुर्ग इसमें गिर न जाए। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
-मो. सलीम, स्थानीय निवासी

नजर चूकी तो हादसा तय

रात को बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। दुपहिया वाहन चलाते समय हर पल डर लगता है कि कहीं गड्ढ़े में न गिर जाए। पूर्व में हुए हादसे किसी से छिपे नहीं हैं। -गीत कुमारी, छात्रा

खुले गड्ढ़े खतरनाक

जैसलमेर घूमने आए थे, लेकिन शहर में इतनी बुनियादी समस्या देखकर हैरानी हुई। यह टूरिज्म के लिए अच्छा संकेत नहीं है। शहर बहुत सुंदर है, लेकिन सड़कों पर खुले गड्ढ़े खतरनाक हैं। खासकर रात में चलना असुरक्षित लगता है।
-राहुल मेहता, पर्यटक, गुजरात