scriptClouds of apprehension hovering over the 'pearls' of the two and a hal | ढाई शताब्दी पुराने 'महल' के 'मोतियों' पर फिर मंडराये आशंका के बादल-तूफान | Patrika News

ढाई शताब्दी पुराने 'महल' के 'मोतियों' पर फिर मंडराये आशंका के बादल-तूफान

-हिलने लगी स्वर्णनगरी की ऐतिहासिक सालमसिंह की हवेली
-बारिश के दिनों में पूर्व में ध्वस्त हो चुके हैं हवेली के कई हिस्से

जैसलमेर

Updated: May 06, 2022 08:10:07 pm

दीपक व्यास -

जैसलमेर. गत दिनों तेज तूफान के कारण ऐतिहासिक सोनार किले के हवा प्रोल के समीप छज्जे व पत्थर गिरने के बाद अब ऐतिहासिक सालमसिंह हवेली पर भी खतरा मंडराने लगा है। इसके साथ ही हवेली के निवासियों और आसपास के बाशिंदों के चेहरे पर चिंता की लकीरे उभरने लगी है। पूर्व में तेज बारिश से नुकसान झेल चुकी यह हवेली इन दिनों चल रहे तेज तूफान और आगामी बारिश के मौसम को देखते हुए हादसे को निमंत्रण दे रही है। दीवान सालमसिंह की हवेली को 'मोतीमहलÓ के नाम से भी पहचाना जाता है। सरकारी स्तर पर हवेलियों के संरक्षण के लिए योजनाएं तो बनी, लेकिन उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन आज तक देखने को नहीं मिला है। गौरतलब है कि वर्ष 1993 और 2006 में हुई बारिश की वजह से हवेली के शीर्ष भाग पर बने मयूराकृति के कंगूरे गिर गए थे तथा पीले पत्थरों से जडि़त हवेली की शीर्ष छत को भी नुकसान पहुंचा। बरसाती पानी की निकासी के माकूल प्रबंध न होने से भी खतरा बढ़ा है।
हवेली के निवासी कमलसिंह मोहता ने इस संबंध में पुरातत्व विभाग को हवेली की मौजूदा स्थिति से अवगत कराते हुए इसके शीघ्र जीर्णोद्धार करवाने की मांग की है, साथ ही सुध नहीं लेने पर हादसे की आशंका भी जताई है। उधर, इन दिनों जैसलमेर में इन दिनों तेज आंधियों का दौर चल रहा है, ऐसे में उनकी चिंता भी लाजमी है। किसी जमाने में स्वर्णनगरी की पटवा हवेलियों जैसी सुंदर मानी जाने वाली हवेली की आकर्षण अब कम इसलिए हो चुका है, क्यों कि विगत वर्षों में इसकीद 38 में से 15 बंगलियां ध्वस्त हो चुकी हैं। यहां कई बार कंगूरे और पत्थर वर्षाकाल में धराशायी हो चुके हैं। बारिश की वजह से पूर्व में सालमसिंह हवेली के भीतर कंगूरे व पत्थर गिरने की घटना आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में ताजा है।
राज्य सरकार ने 14 अक्टूबर 1976 को इस ऐतिहासिक धरोहर को 'संरक्षितÓ घोषित किया था, लेकिन इसके बाद से पर्यटन, कला और संस्कृति विभाग के साथ पुरातत्व विभाग का ध्यान भी इस ओर नहीं है।
ढाई शताब्दी पुराने 'महल' के 'मोतियों' पर फिर मंडराये आशंका के बादल-तूफान
ढाई शताब्दी पुराने 'महल' के 'मोतियों' पर फिर मंडराये आशंका के बादल-तूफान
ऐसी है ऐतिहासिक हवेली
-दीवान सालमसिंह के पिता दीवान स्वरूपसिंह ने शुरू किया था।
-संवत् 1819 में स्वरूपसिंह दीवान ने दो मंजिल तक का निर्माण कराया था।
-जानकारों के अनुसार इसके बाद दीवान सालमसिंह ने हवेली को सोनार किले तक की ऊंचाई तक ले जाने के लिए आठवीं मंजिल का निर्माण भी करवा दिया।
-हवेली के छत से सोनार किले के राजप्रसादों में पहुंचने के लिए एक झूले का निर्माण कार्य करवाए जाने से पहले ही तत्कालीन महारावल ने हवेली की आठवीं मंजिल को गिरवा दिया।
-हवेली के ऊपरी हिस्से में अद्भुत कला के सौन्दर्य से युक्त 38 बंगलियां निर्मित करवाई गई।
-यहां बेल्जियम से मंगवाए गए दर्पण छत पर व दीवारों पर लगे हैं तथा इटालियन मार्बल का भी उपयोग किया गया है।
-हवेली की शिल्पकला, ऊपरी मंजिल, खंभे व प्राचीन कला के संरक्षण व हवेली के जीर्णोद्धार के लिए करीब 50 लाख रुपए के प्रस्ताव विभाग को भेजे गए थे।
-बाद में एक बार 10 लाख रुपए की राशि और स्वीकृत की गई थी मगर तय समय में राशि खर्च नहीं होने से बजट लैप्स हो गया।

आंधी-तूफान व बारिश का मौसम बन रहा खतरा
आसनी रोड स्थित पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारक दीवान सालमसिंह हवेली स्थापत्य कलीा का 18 वीं शताब्दी का महत्वपूर्ण भवन है। संरक्षित स्मारक होने के कारण मकान मालिक की ओर से कोई कार्य रनहीं करवाया जा सकता। हवेली पुरानी होने के कारण जर्जर हालत में हो गई है। अमूमन हर बारिश के मौसम या फिर आंधी-तूफान में इसका भाग टूटकर सड़क पर गिरता रहता है। उक्त हवेली के जीर्णोद्धार को लेकर पुरातत्व निदेशक को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है।
-कमलसिंह मोहता, निवासी सालमसिंह हवेली, जैसलमेर

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