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शिविर का समापन, बांटे प्रमाण पत्र

शिविर का समापन, बांटे प्रमाण पत्र

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शिविर का समापन, बांटे प्रमाण पत्र

शिविर का समापन, बांटे प्रमाण पत्र

पोकरण. कृषि विज्ञान केन्द्र में 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार विषय पर आयोजित प्रशिक्षण शिविर का शनिवार को समापन किया गया तथा प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शिविर में बाड़मेर, जोधपुर, जालोर, जैसलमेर से 33 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय के निदेशक डॉ.सुभाषचंद्र ने किसानों व केन्द्र के बीच कड़ी का कार्य करने की आवश्यकता बताई तथा खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण में केन्द्र की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाना चाहिए तथा उसी के अनुसार सिफारिश की गई। संतुलित खाद एवं उर्वरकों का सही समय पर सही मात्रा में सही तरीके से उपयोग करें, ताकि उनकी उपयोग दक्षता बढ़ सके। उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती बाड़ी के साथ कृषि एवं दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन कर लघु एवं कुटिर उद्योगों को अपनाकर और वैज्ञानिक तरीकों को कृषि, पशुपालन, बागवानी एवं किचन गार्डन में शामिल कर किसान निश्चिततौर पर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर ग्रामीण सैक्टर में रोजगार उत्पन्न करने की बात कही। उन्होंने केन्द्र की ओर से संचालित गतिविधियों एवं वैज्ञानिकों की ओर से किए जा रहे कार्यों की सराहना की। केन्द्र के प्रभारी डॉॅ.बलवीरसिंह ने बताया कि खुदरा उर्वरक विक्रेता गांवों में किसानों के प्रथम मित्र होते है। ऐसे में उर्वरक विक्रेताओं का कर्तव्य बनता है कि उनके विश्वास पर खरे उतरे तथा पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेवारी का पालन करें। कृषि में उत्पादकता एवं आमदनी बढ़ाने के लिए आदानों की उपयोग दक्षता तक बढ़ानी होगी। इस मौके पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ.केजी व्यास, सुनील शर्मा, बबलू शर्मा, डॉ.रामनिवास ढाका आदि उपस्थित रहे।