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‘संस्कारवान, त्यागी और तपस्वी लोग समाज और राष्ट्र के कार्य में बनें सहयोगी’

-हीरक जयंती सहयोगियों का स्नेह मिलन कार्यक्रम

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'संस्कारवान, त्यागी और तपस्वी लोग समाज और राष्ट्र के कार्य में बनें सहयोगी'

'संस्कारवान, त्यागी और तपस्वी लोग समाज और राष्ट्र के कार्य में बनें सहयोगी'


जैसलमेर. क्षत्रिय युवक संघ जैसलमेर संभाग के तत्वावधान में आयोजित हीरक जयंती समारोह का स्नेह मिलन व स्नेह भोज कार्यक्रम संभागीय कार्यालय तनाश्रम में आयोजित हुआ। प्रारंभ में गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम का आगाज किया गया। संभाग प्रमुख तारेन्द्रसिंह झिनझिनयाली ने कहा कि बिना सहयोग के कोई कार्य सफल नहीं होता। हमारा सामाजिक भाव किस तरह से बढ़े, कौम रूपी मां का हम दिव्य दर्शन कर सके, हम सभी ने हीरक जयंती महोत्सव में महसूस किया ,जितना सोचा नहीं उतना भव्य कार्यक्रम होगा, लेकिन यह राष्ट्रीय स्तर तक का कार्यक्रम बन चुका हैं। हर एक की जुबान पर प्रशंसा हो रही है, हम कितने अनुशासित हैं, कितने संस्कारित हैं और कितने मर्यादित हैं, यह संसार के लोगों ने इस हीरक जयंती समारोह में देखा। सभी ने महसूस किया क्षत्रिय युवक संघ ही इस तरह की संस्था है जो भावी पीढ़ी को सही रास्ते की ओर मोड़कर उन्हें अच्छाई की ओर बढ़ाती है। वरिष्ठ स्वयंसेवक बाबूसिंह बैरसियाला ने कहा कि संघ परमार्थ का कार्य है। जिसके अंदर सामाजिक भाव होगा, वही संघ में आएगा। जिसके अंदर त्याग की भावना होगी, वही आगे आकर के संघ का कार्य करेगा। तनसिंह ने इसी तरह के एक संगठन का निर्माण किया, जिसमें संस्कारवान होकर त्यागी और तपस्वी लोग समाज और राष्ट्र के कार्य में सहयोगी बन सके।
भवानीसिंह मुंगेरिया द्वारा संघ कार्य की भूमिका के साथ हीरक जयंती कार्यक्रम पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि जो परमेश्वर को मंजूर होता है वह होकर ही रहेगा, उसे संसार की कोई ताकत रोक नहीं पाएगी। बाधाएं दुविधा आएगी, लेकिन उन बाधाओं से ना घबराने वाले लोग अविचल पर्वत की भांति डटे रहेंगे और अपना कार्य की चलेंगे। कार्यक्रम को पूर्व विधायक छोटूसिंह भाटी, विक्रमसिंह नाचना, सम प्रधान तनसिंह सोढ़ा, गणपतसिंह अवाय, आईदानसिंह भादरिया आदि की ओर से संबोधित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक सांगसिंह भादरिया, खेमेंद्रसिंह जाम, देवीसिंह भणियाना, गुलाबसिंह गड़ी, लखसिंह झाला, जनकसिंह प्रधान फतेहगढ़, निर्मल पुरोहित, हाथीसिंह मूलाना, कंवराजसिंह चौहान, सगतसिंह, सवाईसिंह गोगली, दानसिंह, कंवराजसिंह चांधन, बलवंतसिंह मूलाना, सरपंच स्वरूपसिंह तेजमालता, सुजानसिंह हड्डा, भंवरसिंह साधना, विक्रमसिंह खुहड़ी, गोरधनसिंह कुंडा, नरेंद्रसिंह बैरसियाला, हजारसिंह पारेवर, कोजराजसिंह सोनू, पूनमसिंह कीता आदि उपस्थित थे।