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अब सीमा क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर कसा जाएगा शिकंजा, शुरू हुआ विशेष सर्वे

सर्वे का कार्य करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुआ था और अधिकारियों को अक्टूबर तक इसे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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India-PAK border in Rajasthan - File PIC

India-PAK border in Rajasthan - File PIC

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में अवैध निर्माणों और कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में बने सभी निर्माणों का विशेष सर्वे किया जा रहा है। बीएसएफ, इंटेलिजेंस ब्यूरो और राजस्व विभाग के समन्वय से चल रहे उक्त अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वे का कार्य करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुआ था और अधिकारियों को अक्टूबर तक इसे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। गौरतलब है कि हाल ही में बीकानेर दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा क्षेत्र में अवैध कब्जों और संदिग्ध निर्माणों को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी और जांच अभियान शुरू किया गया।

भारी निवेश वाले निर्माणों की फंडिंग भी जांच के दायरे

जैसलमेर सहित अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े क्षेत्रों में निर्माणों की वैधता, स्वामित्व और उपयोग की गहन पड़ताल की जा रही है। जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। राजस्व विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर निर्माणों के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण स्वीकृत नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

दिवाली से पहले अवैध कब्जों पर कार्रवाई की तैयारी

अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बड़े निवेश वाले निर्माणों की वित्तीय जांच है। प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि सीमा क्षेत्र में बने भवनों और अन्य संरचनाओं के निर्माण में धन कहां से आया तथा इसके पीछे कौन लोग जुड़े हुए हैं। यदि किसी निर्माण में असामान्य रूप से अधिक निवेश पाया जाता है तो उसकी अलग से जांच कराई जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियां भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो, बीएसएफ और सैन्य खुफिया इकाइयां ऐसे निर्माणों की पृष्ठभूमि, संबंधित व्यक्तियों और धन के स्रोत की जानकारी जुटाएंगी। अधिकारियों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में होने वाली गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी संदिग्ध मामले की गहन जांच आवश्यक है।

स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत बनाने की कवायद

प्रशासन स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को भी मजबूत कर रहा है। इसके लिए पटवारियों, पशुपालकों, पूर्व सैनिकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ने की योजना बनाई गई है। गांव-गांव से सूचना जुटाने वाला यह नेटवर्क किसी भी नए अतिक्रमण, संदिग्ध गतिविधि या अवैध निर्माण की जानकारी समय पर प्रशासन तक पहुंचाने में मदद करेगा। प्रशासन ने सर्वे और जांच प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य है कि दिवाली से पहले अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए।