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खतरे में 867 वर्ष पुराने सोनार किले की दीवार, खतरे में सैकड़ों जिंदगियां

-परकोटे की कमजोर दीवार से निकल रहे पत्थर-खतरे में सैकड़ों जिंदगियां, पूर्व में घटित हादसों से भी सबक नहीं

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खतरे में 867 वर्ष पुराने सोनार किले की दीवार, खतरे में सैकड़ों जिंदगियां

खतरे में 867 वर्ष पुराने सोनार किले की दीवार, खतरे में सैकड़ों जिंदगियां

करीब 867 वर्ष पुराने ऐतिहासिक सोनार किले के परकोटे की दीवार दरकने लगी है और इसके पत्थर भी बाहर निकलने लगे हैं। बुजुर्ग किले का आकर्षण तो अभी तक जवां है, लेकिन परकोटे की दीवार का एक हिस्सा जर्जर हो चुका है और इसके दुर्भाग्यवश ढहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि शहर के गोपा-चौक से शिव मार्ग जाने वाली रोड पर दर्जनों दुकान व मकान बसे हैं, वहीं सैकड़ों वाहनों व राहगीरों की आवाजाही हर दिन यहां से होती है। यहां दुर्ग के चारों और बनी दीवार के पत्थर बाहर निकल रहे हैं, वहीं अवांछित रूप से उगी झाडिय़ों ने इसकी पकड़ को और कमजोर कर दिया है। दीवार को दुरुस्त करवाने को लेकर जिम्मेदारों की लापरवाही किसी से छिपी नहीं है। गौरतलब यह है कि उक्त मार्ग से कुछ दूरी पर ही सब्जी मंडी के समीप कुछ वर्ष पहले किले की ही दीवार ढहने से एक दर्जन जिंदगियां काल का ग्रास बन चुकी है।

हर समय मंडरा रहा खतरा

तेज अंधड़, तूफान, अतिवृष्टि या फिर भूकम्प के झटके से दीवार ढहने की आशंका बनी हुई है। स्वर्णनगरी के हृदय स्थल गोपा चौक से शिव मार्ग तक और सोनार दुर्ग के परकोटे दीवार के अन्य हिस्सों पर कई जगह दीवार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। यहां पत्थर इतने बाहर निकल चुके हंै कि वाहन चालक या राहगीर या फिर आसपास रहने वाले लोग व दुकानदारों की जिंदगी पर खतरा बना हुआ है।

फैक्ट फाइल

-867 वर्ष पुराने किले का कमजोर हो रही है परकोटे की दीवारें

-99 बुर्ज है जैसलमेर के सोनार दुर्ग की विशेष पहचान

-400 परिवार के करीब निवास करते हैं ऐतिहासिक दुर्ग में

-1993 से यहां निर्माण कार्य पर लगाई गई है रोक

-2 वार्ड में विभक्त है स्वर्णनगरी का ऐतिहासिक सोनार किला

हादसों से भी सबक नहीं

-विगत वर्षों में बारिश के दौर और भूकम्प के झटकों ने दुर्ग को कमजोर किया है।

-बढ़ते जल-मल की माकूल निकासी न होने से स्थिति कोढ़ में खाज जैसी हो गई है।

-गौरतलब है कि सोनार किले के परकोटे की दीवारें दो बार एकाएक ढह चुकी है।

-वर्ष 1997 में गोपा चौक में सोनार किले के परकोटे की दीवार ढहने से छह जनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

-उक्त हादसे के बाद इस दीवार को नए सिरे से बनाया गया था।

-वर्ष 2015 में भी ढिब्बा पाड़ा क्षेत्र में एकाएक दीवार ढहने गर्ई थी।