
मरुस्थलीय सीमा क्षेत्र में चल रहे युद्धाभ्यास के दौरान पश्चिमी कमान के खडग़ा कॉर्प्स के इंजीनियर्स की ओर से तैयार किए गए सशस्त्र ड्रोन ने अपना जबर्दस्त जलवा दिखाया है। ड्रोन्स ने आकाश से काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को चुन-चुन कर निशाने पर लिया और एक धमाके साथ उन्हें उड़ा दिया। युद्धाभ्यास में किए गए ट्रायल के दौरान सशस्त्र ड्रोन ने मिट्टी में दबी माइंस और बंकरों को पहले चंद सैकंड्स में खोज निकाला और फिर उन्हें गोला-बारूद से उड़ा दिया। इसकी खासियत है कि ये 50 किलो तक के हथियार और बम अपने साथ ले जा सकता है।
ये ड्रोन दुश्मनों के छुपे बंकर तक ढूंढ लेता है। इसमें लगे कैमरे टारगेट को लॉक करने के बाद मोर्टार को लॉन्च कर देते हैं। ये ड्रोन दुश्मनों के छुपे बंकर ढूंढ लेता है। इसमें लगे कैमरे टारगेट को लॉक करते ही मोर्टार को लॉन्च कर देते हैं। जानकारी के अनुसार इन ड्रोन में मोर्टार शेल ड्रॉप सिस्टम लगे हुए हैं। जो इस तरह से काम करते हैं। यह मुख्य रूप से एक मैकेनिकल रिलीज मैकेनिज्म है, जिसे ड्रोन के नीचे फिट किया जाता है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि उड़ान के दौरान विस्फोटक सुरक्षित रहे और गिरने के समय सीधे नीचे की ओर जाए। परीक्षण के दौरान खडग़ा कॉर्प्स की ओर से सेना के अधिकारियों को ड्रोन के बारे में जानकारी दी गई।
युद्ध के दौरान दुश्मन सेना अक्सर अपनी सुरक्षा के लिए रास्ते में बारूदी सुरंगें, कंटीले तारों के जाल और कंक्रीट की मजबूत दीवारें खड़ी कर देती है। इन बाधाओं को हटाने के लिए कॉम्बैट इंजीनियर्स को दुश्मन की सीधी गोलीबारी के बीच रेंगते हुए आगे बढऩा पड़ता था। इसके बाद मैन्युअल तरीके से विस्फोटक लगाकर रास्ता साफ करना होता था। अब श्खडग़ा सैपर्स ने इसे बदल दिया है। मीलों दूर बैठकर ही कमांड सेंटर से इस अदृश्य तीसरी आंख कहे जाने वाले ड्रोन को नियंत्रित किया जाता है। ये ड्रोन हवा से ही सटीक निशाना लगाकर दुश्मन के बंकरों और रुकावटों को मलबे में तब्दील कर देता है।
खतरनाक ऑपरेशन्स में सैनिकों को सीधे खतरे में पडऩे की जरूरत नहीं होगी। ड्रोन तकनीक इतनी तेज है कि दुश्मन को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का मौका ही नहीं मिलता। ये ड्रोन न केवल हमला कर सकते हैं, बल्कि रीयल टाइम निगरानी भी करते हैं, जिससे सेना को दुश्मन की हर हरकत का पता रहता है।
Published on:
21 Feb 2026 08:58 pm
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