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फसल कटाई के सीजन में रामदेवरा इन दिनों प्रवासी मजदूरों का केंद्र बन गया है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों और राजस्थान के विभिन्न जिलों से हजारों मजदूर यहां पहुंच चुके हैं। वर्तमान में फसल कटाई का काम अभी खेतों में शुरू नहीं हुआ है।
ऐसे में समय से पहले आए मजदूरों के दल कमठा कार्य में मजदूरी कर रहे। ऐसे में क्षेत्र के नोखा चौराहा पर सुबह के समय मजदूरों की भीड़ जमा रहती हैं, वहीं कारीगरों और कमठा करवाने वाले मजदूरों को लेने के लिए यही आते हैं।
रबी की विभिन्न फसल पकने के बाद मार्च के महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। किसानों को अपनी फसल सुरक्षित लेने की चिंता रहती है, ऐसे में वे मजदूरों को मुंहमांगे दाम देने को मजबूर रहते हैं। क्षेत्र में इन दिनों सरसों, चना, इसबगोल और जीरा जैसी फसलों चुकी है। कई बार मौसम के बदलते मिजाज से नुकसान की आशंका के चलते किसान जल्दी से जल्दी कटाई करवाना चाहते हैं, लेकिन मजदूरों की कमी उनके लिए परेशानी का कारण बनी जाती है। खेतों में कार्य के दौरान मजदूरों को न केवल 500 रुपए तक की मजदूरी दी जा रही है, बल्कि भोजन, किराया और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
रामदेवरा में हर बस और ट्रेन में मजदूरों की भीड़ देखी जा रही है। खेतों में काम के लिए किसान और ठेकेदार पहले से मजदूरों का इंतजार करते मिलते हैं। यहां हर साल 20 से 25 हजार प्रवासी मजदूर आते हैं, जो आसपास के 100 किमी के दायरे में मजदूरी करने जाते हैं।
फसल कटाई का कार्य मशीनों से भी किया जा सकता है, लेकिन अधिकतर किसान अभी भी परंपरागत तरीके को ही प्राथमिकता देते हैं। मजदूरों की मांग बढऩे से किसानों को अतिरिक्त सुविधाएं देनी पड़ रही हैं। मजदूरों को खेतों तक लाने-ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। फसल कटाई का यह सिलसिला आगामी दो महीनों तक जारी रहेगा। किसानों की निर्भरता प्रवासी मजदूरों पर लगातार बढ़ रही है।
Published on:
21 Feb 2026 09:17 pm
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