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सीमा क्षेत्र की चुनौतियां और उसके समाधान के लिए मांग पत्र दिया

-उपराष्ट्रपति नायडू से मिला सीमाजन का प्रतिनिधि मंडल

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सीमा क्षेत्र की चुनौतियां और उसके समाधान के लिए मांग पत्र दिया

सीमा क्षेत्र की चुनौतियां और उसके समाधान के लिए मांग पत्र दिया


जैसलमेर. उपराष्ट्रपति एम. वैंकेया नायडू की जैसलमेर यात्रा के दौरान सीमाजन कल्याण समिति ने सोमवार को सर्किट हाउस में उनका स्वागत अभिनंदन करते हुए सीमा क्षेत्र की चुनौतियां और उनके समाधानों को लेकर एक ज्ञापन प्रस्तुत कर उसके क्रियान्वयन की मांग रखी। सीमाजन कल्याण समिति के प्रदेश संगठन मंत्री राजस्थान-गुजरात नीम्बसिंह की उपस्थिति में मिले शिष्टमंडल में प्रांत उपाध्यक्ष खेताराम लीलड़, प्रदेश मंत्री विरेन्द्रसिंह सोढा, प्रांत टीम के शरद व्यास, जिलाध्यक्ष सवाईदान व जिला मंत्री भूरसिंह बीदा शामिल थे। जिलाध्यक्ष सवाईदान ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान का जैसलमेर जिला सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है, लेकिन यहां पर राज्य धर्म स्थल कानून का उल्लंघन हो रहा है। बॉर्डर पर सीमा चौकियां के नजदीक प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनाधिकृत धार्मिक स्थलों का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा में खतरा उत्पन्न कर रहे है। सामरिक महत्व की भारत माला परियोजना के तहत जैसलमेर से म्याजलार और मुनाबाव से बींजराज का तला के बीच विगत तीन वर्षों से डीएनपी की आपत्ति की वजह से सड़क निर्माण रुका पड़ा है। जो सुरक्षा में सुराख पैदा करने वाली विसंगति है। समिति ने जैसलमेर जिले के सीमावर्ती युवाओं को सैन्य भर्ती में शामिल करने के लिए विशेष छूट प्रदान करने और जैसलमेर में सैनिक स्कूल खोलने की मांग की है। उपराष्ट्रपति को प्रस्तुत मांग पत्र में पाकिस्तान से उत्पीडित होकर भारत आने वाले पाक विस्थापितों को नागरिकता प्रदान करने के नियमों में शिथिलता प्रदान करने और परमाणु परीक्षण की शौर्य गाथा को चिरस्थाई बनाये रखने के लिए पोकरण में म्यूजियम बनाकर इसे पर्यटन क्षेत्र के रुप में विकसित करने के साथ सीआइडी, बीआइ की बंद चौकियों को खुफिया तंत्र की मजबूती प्रदान करने के लिए पुन: खोलने की मांग प्रमुखता से रखी गई है।