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बकरियों में आहार प्रबंधन का दिया प्रशिक्षण

बकरियों में आहार प्रबंधन का दिया प्रशिक्षण

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बकरियों में आहार प्रबंधन का दिया प्रशिक्षण

बकरियों में आहार प्रबंधन का दिया प्रशिक्षण

पोकरण. कृषि विज्ञान केन्द्र के सभागार में शुक्रवार को बकरियों में वैज्ञानिक आहार प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 25 किसानों व पशुपालकों ने भाग लिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ.बलवीरसिंह ने बताया कि बकरी पालन वर्षभर निरंतर चलते रहने वाला उच्च लाभ प्रदाय करने वाला व्यवसाय है। बकरियों से हमें मांस, दूध एवं खाद प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि बकरियों के संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण तथा विटामिन जैसे प्रमुख अवयव शारीरक आयु के अनुसार आवश्यक मात्रा मे होने चाहिए, ताकि बकरियों के उत्पादन, प्रजनन क्षमता एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव नहीं पड़े। पशुपालन वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ.रामनिवास ढाका ने बकरियों के वैज्ञानिक आहार प्रबंधन पर चर्चा करते हुए बताया कि बकरी को प्रतिदिन उसके भार का 3.5 प्रतिशत शुष्क आहार खिलाना चाहिए तथा एक वयस्क बकरी को प्रतिदिन 1.3 किलो हरा चारा, 500 ग्राम से एक किलो भूसा तथा 150 ग्राम से 400 ग्राम तक दाना और 10 से 20 ग्राम खनिज लवण खिलाना चाहिए। साथ ही सर्दियों में बकरियों को गुनगुना पानी कम से कम दिन मे तीन बार पिलाना चाहिए। उन्होंने अधिक दूध व मांस उत्पादन, गाभिन बकरी तथा प्रजनन के काम आने वाले बकरों आदि को उनके वजन व उत्पादन के आधार पर संतुलित दाना-चारा तथा पोषक तत्व के साथ उचित मात्रा में खनिज लवण नियमित रूप से देने की बात कही। प्रशिक्षण में बकरी आहार प्रबंधन की पद्धतियां, टीथरिंग चराई, गहन चराई, चराई विहीन पूर्णत: घर पर बांधकर खिलाना, अर्घ गहन एवं बकरी पोषण से संबंधित सावधानियों की जानकारी दी। बकरियों के ब्याने के तुरंत बाद गुड़ एवं अजवाईन को पानी में घोलकर अगले चार दिनों तक देने से बकरियों में ब्याने उपरांत आने वाली सभी समस्याओं से निजात मिल जाती है। केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ.केजी व्यास ने बकरी पालन के आहार में हरे चारे के महत्व पर चर्चा कर बताया कि खेजड़ी की लूंग, शहतूत, सहजन, नीम, अरडु व बबूल आदि को खिलाने से बकरियों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। अधिक प्रोटीन युक्त दलहनी फसलें जैसे बरसीम, लूसर्न, मटर, लोबिया, ग्वार, स्टाइलों व अन्य नैपियर एवं फसलें जैसे ज्वार, मक्का, बाजरा, मक्काचरी, पैरा, घास, जई व मानसूनी घासें बकरियों के लिए उपयुक्त होती है।