
Diwali 2023: प्रसिद्ध है पोकरण की लाल मिट्टी के कलात्मक दीपक
दीपावली के त्यौहार को देखते हुए कस्बे में स्थानीय लाल मिट्टी से बने दीपक, गणेश व लक्ष्मी की छोटी छोटी प्रतिमाओं की बिक्री जोरों पर चल रही है। पोकरण की लाल मिट्टी के बने कलात्मक खिलौनों ने देश विदेश में अपनी पहचान बनाई है और विभिन्न खिलौने व अन्य सामान देश के बड़े शहरों में लगने वाले हाट बाजारों में विक्रय किए जाते है। गत एक महीने से यहां के कुम्हार समाज के लोग दीपक बनाने का कार्य कर रहे है, जो कस्बे के अलावा जैसलमेर, बाड़मेर व जोधपुर जिले के फलोदी, बालेसर, शेरगढ़ आदि गांवों में भी बिकते है। जिससे उन परिवारों को दीपावली के मौके पर अच्छा रोजगार मिल जाता है। कस्बे के विभिन्न बाजारों व मुख्य सड़कों पर लोग हाथ ठेले पर तरह-तरह के कलात्मक छोटे बड़े दीपक व विभिन्न कलात्मक वस्तुएं मिट्टी के गुलक आदि विक्रय करते देखे जा सकते है। कस्बे के भवानीपोल क्षेत्र में निवास करने वाले 100 से अधिक कुम्हार परिवार दीपावली के दिनों में मिट्टी के दीपक बनाने का कार्य करते है।
मिट्टी के खिलौनों ने बढ़ाई पहचानयहां निवास कर रहे कुम्हार जाति के परिवार दीपावली के दौरान लाल मिट्टी के दीपक बनाने का कार्य करते है। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन बनाने में भी ये कलाकार सिद्धहस्त है, लेकिन इस कार्य में उन्हें पर्याप्त आमदनी नहीं होती थी। इसी को लेकर विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से कस्बे के युवा कुंभकलाकारों ने अपनी कला व हुनर के माध्यम से नया रास्ता अपनाते हुए तरह-तरह के खिलौने व मूर्तियां बनाने का कार्य शुरू किया। अब अधिकांश परिवार अपने परंपरागत हुनर को आगे बढ़ाते हुए मिट्टी के बर्तन, दीपक बनाने के साथ तरह-तरह के आकर्षक खिलौने व देवी देवताओं और महापुरुषों की मूर्तियां बनाने का कार्य कर रहे है। इन सिद्ध हस्तकलाकारों की ओर से बनाई गई मूर्तियां व खिलौने देश के कौने कौने में लगने वाले हाट बाजारों में अच्छी कीमत में बिकने लगे है। जिसके चलते पोकरण की इस कला को नई पहचान मिली है।
फैक्ट फाइल:-- 427 परिवार वर्षभर करते है मिट्टी के सामान बनाने का कार्य
- 114 परिवार 2 महीने तक करते है मिट्टी के दीपक व मूर्तियां बनाने का कार्य- 2200 से अधिक दीपक बनाता है एक परिवार प्रतिदिन
- 2 माह में होता है लाखों का व्यापार
Published on:
10 Nov 2023 08:33 pm
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