
सरहदी जिले की पावन भूमि पर दीपावली के अवसर पर घरों, दुकानों और मंदिरों में रंगोली सजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल दिवाली के करीब आते ही यहां के लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों के आंगन और प्रवेश द्वारों पर रंग-बिरंगी रंगोली सजाते हैं, जो दीपों की जगमगाहट के साथ मिलकर अनुपम छटा बिखेरती है। माना जाता है कि रंगोली सजाने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। जैसलमेर की रंगोली सजावट में पारंपरिक लोक कलाओं और आधुनिक डिजाइनों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यहां की महिलाएं हाथों से जटिल डिजाइनों और विभिन्न रंगों का इस्तेमाल करते हुए जटिल आकृतियां बनाती हैं, जिनमें फूल, दीपक, स्वस्तिक और अन्य पवित्र चिह्न शामिल होते हैं। विशेष रूप से बाजारों में दुकानदार भी अपनी दुकानों के बाहर रंगोली बनाकर ग्राहकों का स्वागत करते हैं, जिससे दीपावली का उत्साह और बढ़ जाता है।
जैसलमेर के विभिन्न मोहल्लों में दीपावली के समय रंगोली सजाने के लिए प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होता है, जिसमें युवा पीढ़ी बढ़.चढ़ कर हिस्सा लेती है। यह आयोजन न केवल पारंपरिक कलाओं को जीवंत बनाए रखने में सहायक होते हैं बल्कि लोगों को एक मंच प्रदान करते हैं, जहां वे अपनी रचनात्मकता और संस्कृति के प्रति लगाव को अभिव्यक्त कर सकते हैं।
जैसलमेर में दीपावली के दौरान रंगोली सजाने की यह परंपरा दीपों के पर्व को और खास बना देती है। गृहणी ेहेतल खत्री बताती है कि रंगोली न केवल सौंदर्य का प्रतीक है बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और खुशियों का प्रतीक भी है। दीपावली की रात जब घर-घर दीपक जलाए जाते हैं और रंगोली के बीच दीयों की रोशनी बिखरती है तो पूरा जैसलमेर एक सपनों की दुनिया सा नजर आता है।
Published on:
28 Oct 2024 11:18 pm
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