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पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव: अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस, भाजपा में भी दरारें

-जाजम बिछाने में जुटे प्रमुख.प्रधान पद के दावेदार-कुर्सी के लिए कड़ा होने वाला है संघर्ष

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पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव: अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस, भाजपा में भी दरारें

पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव: अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस, भाजपा में भी दरारें

जैसलमेर. जिलापरिषद और पंचायत समितियों के लिए चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होने के साथ मरुस्थलीय जैसलमेर के रेतीले धोरों में सत्ता की राजनीति के गुल खिलाने में दोनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस व भाजपा के नेता रणनीति निर्माण में जुट गए हैं। राज्य की सत्ता में सीधे भागीदार फकीर परिवार और विधायक रूपाराम धणदे के बीच जहां सत्तासीन कांग्रेस सीधे तौर पर दो फोड़ों में बंटी हुई है तो विपक्षी भाजपा में भी कद्दावर नेताओं के अपने.अपने खेमे हैं। गत शनिवार को भाजपा नेता स्वामी प्रतापपुरी की जैसलमेर विधायक रूपाराम धणदे से उनके घर जाकर मुलाकात किए जाने से राजनीतिक कयासों को नई जमीन मिली है। इन सबके चलते आगामी चुनाव रहस्य-रोमांच से भरपूर किसी कहानी से कम नहीं होंगे।
चुनौतियां घर और बाहर दोनों जगह
जिले के पंचायतीराज सेटअप में कांग्रेस का दबदबा पिछले दो दशक से अनवरत बना हुआ है। ऐसे में कायदे से प्रमुख व प्रधान बनाने में पार्टी को इस बार राज में होने की वजह से ज्यादा जोर नहीं आना चाहिए लेकिन केबिनेट मंत्री व विधायक गुटों के बीच की टकराहट एकदम जमीन स्तर पर पार्टी को दो फाड़ में बांट चुकी है। जिला प्रमुख पद पर मंत्री शाले मोहम्मद के छोटे भाई अब्दुल्ला फकीर तथा जैसलमेर विधायक रूपाराम की पुत्री अंजना मेघवाल की निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों पूर्व में प्रमुख पद पर काबिज हो चुके हैं। कांग्रेस के दोनों खेमे वास्तविक राज की कुंजी पंचायतीराज को किसी हाल में हाथ से नहीं जाने देना चाहते। दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने भाजपा की चुनौती तो स्वाभाविक तौर पर है ही। वह पिछले चार पंचायतीराज चुनावों में अनवरत मिल रही पराजय के सिलसिले को कांग्रेस की फूट का लाभ उठाते हुए तोडऩा चाहती है। भाजपा की तरफ से अभी कोई बड़ा चेहरा स्पष्ट तौर पर प्रमुख पद के लिए सामने नहीं है। जिले में पार्टी का वर्तमान में सबसे बड़ा नाम बन चुके प्रतापपुरी महाराज को राजनीतिक जानकार सबसे मजबूत मान रहे हैं। उनके चुनाव समर में उतरने को लेकर असमंजसता का वातावरण है। दोनों पार्टियों की ओर से प्रमुख व प्रधान पद के दावेदार पिछले अर्से से कागजों पर गणित बिठाने में जुटे हुए हैं। इस गणित को धरातल पर उतारना उनके लिए सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य होने वाला है। पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस को कई कारणों से हमेशा बढ़त मिलती रही है। इस वजह से उसके हौसले बुलंद है वहीं भाजपा केंद्र में सत्तासीन होने और कांग्रेस की अंतर्कलह के चलते अपने लिए उम्मीदों का भावी मंजर देख रही है।
आंकड़ों के आईने में स्थितियां
जिले में सात पंचायत समितियां जैसलमेर, सम, सांकड़ा, मोहनगढ़, नाचना, भणियाणा और फतेहगढ़ है। जिला परिषद में 17 निर्वाचन क्षेत्र हैं। वहीं जैसलमेर, मोहनगढ़, नाचना समितियों में 15-15 तथा सम, सांकड़ाए भणियाणा व फतेहगढ़ में 17.17 निर्वाचन क्षेत्र हैं। जिले में कुल 206 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें मोहनगढ़ में 19, नाचना में 20, सांकड़ा में 29, भणियाणा में 36, फतेहगढ़ में 33, जैसलमेर में 25 और सम समिति में 44 ग्राम पंचायतें हैं। इसी तरह से चुनाव के लिए कुल 568 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।