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jaisalmer: 45 वार्डों की नई तस्वीर ने टिकट के दावेदारों से लेकर रणनीतिकारों तक बदल दी पूरी दिशा

जैसलमेर में आरक्षण लॉटरी ने निकाय चुनाव की पूरी सियासी बिसात ही बदल दी है। 45 वार्डों के आरक्षण से कई दिग्गजों की दावेदारी अटकी, वहीं नए चेहरों को मौका मिला। 20 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होने से टिकट की दौड़ में महिला दावेदार निर्णायक बन गईं।
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nagar parishad

जैसलमेर नगर परिषद 

जैसलमेर. चुनाव की तारीखों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कौन चुनाव लड़ेगा, बल्कि यह है कि कौन किस वार्ड से चुनाव लड़ पाएगा। नगरपरिषद के 45 वार्डों की आरक्षण लॉटरी ने टिकट के कई दावेदारों की तैयारियों को एक झटके में नई दिशा दे दी। जिन वार्डों को सामान्य मानकर दिग्गज महीनों से सक्रिय थे, उनमें से कई अब आरक्षित हो गए हैं। दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग के लिए खुले वार्डों ने नए राजनीतिक चेहरों को अचानक मजबूत दावेदारी का मौका दे दिया है।जनसंख्या अनुपात के आधार पर 45 वार्डों में 5 एससी, 2 एसटी, 9 ओबीसी और 29 सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण तय हुआ है। एससी के वार्ड 11, 31, 38 तथा एससी महिला के 12, 39 आरक्षित हैं। एसटी के लिए वार्ड 9 और एसटी महिला के लिए 10 तय हुआ। ओबीसी के वार्ड 14, 15, 17, 18, 20, 34 तथा ओबीसी महिला के वार्ड 16, 23, 43 आरक्षित हुए।

सामान्य वर्ग में 19 वार्ड और सामान्य महिला के लिए 10 वार्ड निर्धारित हुए हैं। यानी कुल 20 वार्डों में महिला प्रतिनिधित्व का रास्ता खुला है, जिससे इस बार टिकट वितरण में महिला चेहरों की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण रहने वाली है।

एक लॉटरी, लेकिन असर कई स्तरों पर

आरक्षण बदलने का सबसे सीधा असर उन नेताओं पर पड़ा है, जिन्होंने अपने वार्ड में पहले ही नेटवर्क, जनसंपर्क और चुनावी तैयारी मजबूत कर ली थी। अब उनके सामने दो विकल्प हैं—दूसरे वार्ड में नई जमीन तैयार करना या पार्टी से दूसरे चेहरे के लिए रास्ता छोड़ना। इसी के उलट आरक्षित वार्डों में ऐसे दावेदार सक्रिय होंगे, जो अब तक चुनावी राजनीति में दूसरे पायदान पर थे। राजनीतिक दलों के लिए भी यह चुनाव सामान्य टिकट वितरण से अलग होगा।

अब राजनीतिक दलों के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

पुराने दावेदारों को नए वार्डों में फिट करना।

आरक्षित वार्डों में मजबूत नए चेहरे तलाशना।

महिला सीटों पर परिवारवाद से आगे विकल्प खोजना।

बागी दावेदारों से होने वाले नुकसान को रोकना।

सभापति पद की दौड़ को ध्यान में रखकर टिकट बांटना।

सभापति अनारक्षित, इसलिए पार्षद सीटें ही सत्ता की सीढ़ी

जैसलमेर में सभापति पद अनारक्षित है। इसका मतलब है कि किसी एक वर्ग तक शीर्ष पद की संभावना सीमित नहीं है। इसलिए अब वार्ड स्तर का टिकट भी सिर्फ पार्षद बनने की लड़ाई नहीं रहेगा। जिन नेताओं की नजर सभापति की कुर्सी पर है, वे ऐसे वार्डों पर जोर लगा सकते हैं जहां उनकी सामाजिक और राजनीतिक स्वीकार्यता पहले से मजबूत है।

पोकरण में भी बदली राजनीतिक जमीन

पोकरण नगरपालिका के 25 वार्डों की आरक्षण तस्वीर भी साफ हो गई। यहां 3 एससी, 2 एसटी, 5 ओबीसी और 15 सामान्य वर्ग के लिए वार्ड निर्धारित हुए। एससी महिला वार्ड 24, एसटी महिला वार्ड 25 और ओबीसी महिला वार्ड 6 व 23 हैं। सामान्य महिला के वार्ड 3, 8, 11, 15 और 18 तय किए गए हैं।

सबसे अहम बात—अध्यक्ष पद महिला वर्ग में अनारक्षित है। यानी वार्ड आरक्षण के साथ पोकरण की राजनीति में महिला नेतृत्व की संभावनाएं भी सीधे केंद्र में आ गई हैं।