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दुर्ग के परकोटे पर बिछी आग की बिसात

- सूखी घास में दिवाली के मौके दो बार लगी आग

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दुर्ग के परकोटे पर बिछी आग की बिसात

दुर्ग के परकोटे पर बिछी आग की बिसात

जैसलमेर. ऐतिहासिक सोनार दुर्ग के चारों तरफ परकोटे के ऊपरी हिस्से पर उगी घास के चलते हर समय आग भडकऩे का खतरा बरकरार है। दिवाली की रात और उसके अगले दिन में दो बार इस घास पर जलते पटाखों की वजह से आग भभक भी गई। हालांकि समय पर दमकल की गाडिय़ों के पहुंच जाने से आग पर काबू पा लिया गया लेकिन अब भी घास का प_े पर बना जंगल इस ऐतिहासिक विरासत को कुरुप करने के साथ खतरे की आशंका का वाहक भी बना हुआ है। गौरतलब है कि इस बार मानसून काल में जैसलमेर में अच्छी बारिश के चलते 99 बुर्जों वाले सोनार दुर्ग के प_े पर घास उग गई। शुरू-शुरू में यह हरी घास देखने में और फोटोग्राफी में मनोहारी भी नजर आती थी लेकिन पिछले अर्से से यहां घास पूरी तरह से सूख चुकी है। इसके कारण इस पर गिरने वाली कोई भी चिंगारी बड़ी आग का रूप धारण कर सकती है। साथ ही फोटोग्राफी में भी सूखी हुई घास खराब दिखाई देती है। इससे सोनार दुर्ग के दर्शनीय स्वरूप पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। दुर्ग संरक्षण का जिम्मा जिस पुरातत्व और सर्वेक्षण विभाग के पास है, वह कभी भी समय पर दुर्ग की किसी तरह की सार-संभाल में आगे नहीं आता। अब तक दूसरे जिम्मेदार नगरपरिषद ने भी इस घास को हटाने के लिए कवायद शुरू नहीं की है। जबकि इन दिनों हजारों की तादाद में सैलानी स्वर्णनगरी भ्रमण पर आ रहे हैं। इनमें देशी पर्यटकों की संख्या बहुत ज्यादा है। सभी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र सोनार दुर्ग रहता ही है। जब दूर से दुर्ग का विहंगम नजारा कैमरे में कैद किया जाता है तो सैकड़ों साल प्राचीन स्थापत्य के नायाब नमूने के साथ-साथ बेतरतीब घास भी अनिवार्य रूप से शामिल हो जाती है।
जल्द करवाई जाएगी सफाई
सोनार दुर्ग के चारों तरफ उगी हुई घास की सफाई का कार्य जल्द पूरा करवाया जाएगा। जिससे एक बार फिर ऐतिहासिक दुर्ग सुंदर दिखाई देगा।
- हरिवल्लभ कल्ला, सभापति, नगरपरिषद जैसलमेर