8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भारत-पाक सीमा पर पहले टिड्डी तो अब फाका ने बढ़ाई चिंता

पोकरण. भारत-पाक सीमा पर स्थित सरहदी जिले जैसलमेर के किसानों की चिंता थमने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। गत वर्ष कम बारिश और टिड्डियों के हमले ने किसानों की कमर तोड़ दी। इस वर्ष अच्छी बारिश की आस लगाए बैठे किसान बुआई में जुट गए है, लेकिन गत चार माह से टिड्डियों का प्रकोप चल रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जैसलमेर

•

image

Deepak Vyas

•

Updated: 27 Jul 2020, 9:46 AM IST

tiddi

भारत-पाक सीमा पर पहले टिड्डी, तो अब फाका ने बढ़ाई चिंता

पोकरण. भारत-पाक सीमा पर स्थित सरहदी जिले जैसलमेर के किसानों की चिंता थमने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। गत वर्ष कम बारिश और टिड्डियों के हमले ने किसानों की कमर तोड़ दी। इस वर्ष अच्छी बारिश की आस लगाए बैठे किसान बुआई में जुट गए है, लेकिन गत चार माह से टिड्डियों का प्रकोप चल रहा है। कृषि विभाग व टिड्डी नियंत्रण विभाग की ओर से कीटनाशक का छिड़काव किया गया। जिससे टिड्डियों का प्रकोप कुछ कम हुआ, लेकिन अब फाका की समस्या ने किसानों की चिंता को फिर बढ़ा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में दिनोंदिन फाका की संख्या बढ़ती जा रही है। ये फाका पेड़ पौधों, वनस्पति व फसलों को चट कर रहे है। विशेष रूप से गत दिनों बारिश से पूर्व व बाद में किसानों की ओर से की गई बुआई से अंकुरित हो रही फसल को फाका पूरी तरह से खत्म कर रहे है। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई है। दूसरी तरफ इन फाका को नष्ट करने को लेकर अब तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
क्या है फाका
पाकिस्तान की तरफ से गत दो वर्षों से लगातार टिड्डियों का हमला हो रहा है। ये टिड्डी दल पेड़ पौधों, वनस्पति व फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है। दिन में टिड्डी दल हवा के रुख के साथ आगे बढ़ते है। रात में ये दल एक जगह पड़ाव डालते है, जहां उन्हें पर्याप्त भोजन मिल सकेे तथा जमीन के आसपास पानी जमाव स्थल हो। पड़ाव के दौरान ये टिड्डियां अण्डे देती है। हजारों की तादाद में टिड्डियों लाखों अण्डे जमीन के नीचे देकर अगले दिन रवाना हो जाती है। बारिश के बाद जब जमीन में नमी होती है, उस समय इन अण्डों से छोटे टिड्डी दल फाका निकलते है। ये फाका यहां पेड़ पौधों, वनस्पति, फसलोंं, खेतों में अंकुरित हो रहे बीजों को दो गुणा गति से खाते है और मात्र 48 घंटे में ही टिड्डी का रूप लेकर उडऩे लगते है।
बची उम्मीदों पर पानी फेर रहा फाका
किसानों की ओर से गत दिनों अच्छी बारिश की आस लेकर बुआई की गई है। बुआई के बाद फसल अंकुरित होने लगी है। ये फाका दल 48 घंटों तक उडऩे में असमर्थ होने के कारण अंकुरित हो रही फसलों को चट कर रहे है। जिससे किसानों की बची उम्मीदों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है। बावजूद इसके टिड्डी नियंत्रण विभाग व कृषि विभाग की ओर से छिड़काव को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।