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आखिर कब हटेगा नकाब, विरूद्ध कार्रवाई करने का है प्रावधान

- मुंह पर रूमाल बांधकर वाहन चलाने पर कार्रवाई के लिए एमवी एक्ट में भी प्रावधान बना हुआ है।

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For driving verhicle by tying a handkerchief on face is Illegal

आखिर कब हटेगा नकाब, विरूद्ध कार्रवाई करने का है प्रावधान

पोकरण. मुंह पर बंधा रूमाल, सरपट दौड़ती बाइक, पुलिस देखकर भी अनजान, कौन है इस नकाब के पीछे, नहीं किसी को खबर...। ऐसे ही नजारे देखने को मिल रहे है पोकरण कस्बे में, जहां दिन में सरपट बाइक व स्कूटियां दौड़ती है, जिन पर सवार युवक व युवतियां मुंह को ढके रखती है। जिन्हे रोकने की जहमत पुलिस की ओर से नहीं उठाई जा रही है। ऐसे में सीमावर्ती जिले में संदिग्ध गतिविधि की आशंका दिनोदिन बढती जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां संदिग्धों के आने की आशंका अधिक रहती है। यदि कोई संदिग्ध भी बाइक पर मुंह बांधकर आवागमन करता है।

एमवी एक्ट में भी प्रावधान

- मुंह पर रूमाल बांधकर वाहन चलाने पर कार्रवाई के लिए एमवी एक्ट में भी प्रावधान बना हुआ है।

- एमवी एक्ट की धारा 129/177 में रूमाल बांधकर वाहन चलाना चेहरे पर नकाब लगाने की श्रेणी में आता है तथा अपना चेहरा छुपाकर वाहन चलाना गलत है।

- कोई अपराधी भी नकाब या मुंह को किसी कपड़े व रूमाल से ढककर किसी वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो सकता है।

- उनके विरूद्ध कार्रवाई करने का प्रावधान है। बावजूद इसके युवक-युवतियां बेधड़क मुंह पर रूमाल बांधकर दौड़ते नजर आते है।

करते है कार्रवाई

समय-समय पर नाकाबंदी कर रूमाल बांधकर वाहन चलाने वालों व हेलमेट नहीं लगाने वालों के चालान काटे जाते है। प्रतिदिन वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई जारी है।

- खेतसिंह सांखला, प्रभारी यातायात पुलिस,पोकरण

लोक अदालत की कार्य योजना तैयार करने को लेकर चर्चा
-न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक
जैसलमेर. राष्ट्रीय लोक अदालत 08 सितम्बर (द्वितीय शनिवार) को प्रात: 10 बजे से जिला मुख्यालय के संबंधित न्यायालयों और जिला वैकल्पिक विवाद निस्तारण केन्द्र, जैसलमेर सम रोड डाइट के पास एवं तालुका मुख्यालय पोकरण पर संबंधित न्यायालयों में आयोजित होगी। राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन और लम्बित प्रकरणों को समाहित करते हुए शमनीय दाण्डिक अपराध, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम, बैंक रिकवरी मामले, एम.ए.सी.टी. मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम-विवाद, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली व पानी के बिल (अशमनीय को छोडकऱ) मामले, मजदूरी, भत्ते और पेंशन भत्तों से संबंधित सेवा मामले, राजस्व मामले (जिला न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में लम्बित), अन्य सिविल मामले (किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा दावे एंव विनिर्दिष्ट पालना दावे) आदि का निस्तारण राजीनमा के माध्यम से लोक अदालत में किया जाएगा। लोक अदालत की कार्य योजना तैयार करने के संबंध में अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिला एवं सेशन न्यायाधीश), जैसलमेर आशुतोष कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में जिले के न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय जैसलमेर अनिता शर्मा, अपर जिला एवं सेषन न्यायाधीष डॉ. मनोज कुमार सोनी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद तंवर, न्यायिक मजिस्ट्रेट संध्या पूनिया उपस्थित थे तथा पोकरण मुख्यालय से अपर जिला एवं सेषन न्यायाधीश पोकरण डॉ. सूर्यप्रकाश पारीक, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पोकरण प्रिया टावरी एवं न्यायाधिकारी ग्राम न्यायालय सांकड़ा जितेन्द्र कुमार ने जरिये दूरभाष लोक अदालत की बैठक कार्यवाही में भाग लिया।