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विवादों में फंस रहा जीएसएस का गठन

- हर जगह दो पक्ष होने से बढ़ रहा विवाद

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विवादों में फंस रहा जीएसएस का गठन

विवादों में फंस रहा जीएसएस का गठन


पोकरण. राज्य सरकार के निर्देश पर सहकारिता विभाग की ओर से प्रदेशभर में दो हजार से अधिक ग्राम सेवा सहकारी समितियों के गठन को लेकर प्रक्रिया तीन माह से की जा रही है, लेकिन ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के दो पक्ष होने के कारण अब जीएसएस गठन विवादों में पड़ते नजर आ रहे है। गौरतलब है कि जून माह में राज्य सरकार की ओर से सहकारिता विभाग को नए जीएसएस गठन के निर्देश दिए गए थे। जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में दो हजार से अधिक जीएसएस गठन का लक्ष्य रखा गया था। जैसलमेर जिले में 40 का लक्ष्य था। गत वर्ष ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के दौरान ऐसी 116 ग्राम पंचायतों का गठन हुआ, जहां ग्राम सेवा सहकारी समिति नहीं थी। ऐसे में केन्द्रीय सहकारी बैंक जैसलमेर की ओर से जिले में अधिक से अधिक समितियों के गठन का प्रयास किया गया। जुलाई माह में अभियान शुरू हुआ तथा 40 जगहों पर शिविरों का आयोजन कर ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया गया। कई ग्राम पंचायतों पर अभी तक शिविरों का आयोजन भी नहीं किया गया है। नए जीएसएस गठन के लिए जुलाई माह में सहकारिता विभाग की ओर से शिविरों के आयोजन की प्रक्रिया शुरू की गई। जिससे जिलेभर में प्रचार प्रसार हुआ तथा ग्रामीणों को जीएसएस गठन की जानकारी हुई। इस जागरुकता के कारण लगभग हर ग्राम पंचायत से दो पक्षों की ओर से जीएसएस गठन का प्रस्ताव दिया गया है। ऐसे में गांवों में दो पक्ष आमने-सामने होने से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
सिरे नहीं चढ़ पा रही समितियां
जिले के 40 गांवों में विभाग की ओर से शिविरों का आयोजन किया गया। जिन ग्राम पंचायतों में शिविर नहीं हुए, वहां से ग्रामीणों ने सीधे ही आवेदन कर बैंकों में राशि जमा करवा दी है। दो माह में कई ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन हो चुका है, लेकिन विवादों के कारण समितियां सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
नियमानुसार होनी है आमसभाएं
सूत्रों के अनुसार सहकारिता विभाग का नियम है कि यदि किसी ग्राम पंचायत में समिति के गठन के लिए एक से अधिक आवेदन प्राप्त हो जाते है, तो वहां सदस्यों की आमसभा आयोजित कर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव करवाए जाते है। जिले में कुछ जगहों पर आमसभाओं का आयोजन कर चुनाव करवाए जा चुके है, लेकिन विवादों से घिरी ग्राम पंचायतों में चुनाव प्रक्रिया संपन्न नहीं हो पा रही है। पोकरण व भणियाणा उपखंड क्षेत्र में कई ऐसी ग्राम सेवा सहकारी समितियां अधरझूल में अटकी हुई है।
अधिकारियों पर जड़ रहे आरोप
प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो पक्षों की स्थिति बनी हुई है। अब ग्रामीण नियत समय पर आमसभा नहीं होने, निरीक्षक के नहीं पहुंचने व एक तरफा कार्रवाई को लेकर आरोप लगा रहे है। गत तीन दिनों से ज्ञापनों का दौर शुरू हो चुका है, तो ग्राम पंचायतों में विरोध प्रदर्शन हो रहे है। ग्रामीणों की ओर से अधिकारियों पर भी कई तरह के आरोप लगाए जा रहे है।