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पोकरण(जैसलमेर). गरीब मॉं-बाप और मानसिक रोगी भाई की परवरिश करते-करते एक गरीब का छोटी-छोटी बात को लेकर झगड़ा होने लगा और घर की आर्थिक स्थिति के साथ मानसिक अशांति भी बिगडऩे लग गई। जिससे हालात पर काबू करने के लिए परिवार ने ही अपनी संतान को जंजीरों में जकड़ कर राहत की सांस तो ले ली, लेकिन आर्थिक बोझ से इतने दब गए कि उन्हें पेट भरना भी पड़ गया। बीपीएल परिवार की श्रेणी में होने से बेटे के उपचार की हेसियत नहीं होने से चार साल से एक शरीर से स्वस्थ व्यक्ति जंजीरों में जकड़ा है। क्षेत्र के केलावा गांव का निवासी एक व्यक्ति गत चार वर्षों से घर में जंजीरों से जकड़ा हुआ है। जबकि गरीब परिवार को सरकार की ओर से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। गौरतलब है कि केलावा निवासी स्वरूपाराम पुत्र चंदाराम गत चार वर्ष पूर्व सामान्य हालत में था। समय का चक्र ऐसा घूमा कि उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई। ऐसे में वह गत चार वर्षों से जंजीरों में जकड़ा हुआ है तथा घर की चारदीवारी में कैद है।
लोगों से करने लगा झगड़ा व मारपीट, तो बांध दिया जंजीरों से
स्वरूपाराम की मानसिक स्थिति खराब होने के बाद वह आने जाने वाले लोगों से झगड़ा करने लगा। कई बार वह मारपीट के लिए भी उतारू होने लगता। ऐसे में परिवार के लोगों ने उसे जंजीरों से बांध दिया। गत चार वर्षों से एक चारपाई पर वह जंजीरों से बंधा बैठा है।
परिवार का बोझ भी उसी पर
उसके परिवार में मां, पिता, एक छोटा भाई व तीन बहिनें है। मां-पिता के वृद्ध हो जाने से परिवार का बोझ भी स्वरूपाराम पर ही है। एक छोटा भाई है, जो बचपन से ही मानसिक व शारीरिक रूप से बीमार है। परिवार के बोझ के कारण वह मानसिक रूप से परेशान हो गया। बीपीएल चयनित होने के बावजूद कोई सरकारी सहायता नहीं मिलने से न तो उसका उपचार हो रहा है, न ही परिवार को दो जून की रोटी नसीब हो रही है।
लगाई न्यायालय से गुहार
परिवार को मदद के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानकारी मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से परिवार को मदद दिलाने के लिए न्यायालय से गुहार लगाई गई है। मुस्लिम महासभा के जिलाध्यक्ष पप्पु खिलजी की ओर से उच्च न्यायालय में मंगलवार को स्वरूपाराम का उपचार करवाने के लिए विधिक सहायता की अपील की गई है।
Published on:
2 May 2018, 10:17 PM IST
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