5 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गैस महंगी पड़ी, कारोबारियों ने बदला चूल्हा—बिजली और डीजल बने सहारा

शहर के बाजारों में अब चूल्हे की तस्वीर बदल चुकी है। रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने कारोबारियों को पारंपरिक व्यवस्था से बाहर निकलने पर मजबूर किया है।

2 min read
Google source verification

शहर के बाजारों में अब चूल्हे की तस्वीर बदल चुकी है। रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने कारोबारियों को पारंपरिक व्यवस्था से बाहर निकलने पर मजबूर किया है। मिठाई, बेकरी और फास्ट फूड कारोबार में इलेक्ट्रिक और डीजल आधारित भट्टियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है।

यह बदलाव लागत नियंत्रण और काम की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम बनकर सामने आया है। विगत दिनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज हुई। बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, कई दुकानदारों का मासिक खर्च 30 प्रतिशत तक बढ़ गया। इस दबाव के चलते वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर झुकाव तेजी से बढ़ा। ऊर्जा के मिश्रित स्रोत, स्मार्ट उपकरण और लागत की नियमित निगरानी कारोबार का हिस्सा बनते जा रहे हैं। महंगी गैस ने दबाव जरूर बनाया, लेकिन इसी दबाव ने कारोबार को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की दिशा भी दी है।

क्या बदल रहा है बाजार में

-इलेक्ट्रिक भट्टियां और इंडक्शन उपकरण तेजी से अपनाए जा रहे

-डीजल यूनिट बिजली कटौती वाले क्षेत्रों में मुख्य विकल्प बने

-हाइब्रिड मॉडल से संचालन में लचीलापन और लागत नियंत्रण संभव

-पारंपरिक कोयला और लकड़ी चूल्हों का उपयोग लगातार घट रहा

-नियमित बिजली आपूर्ति वाले क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक सिस्टम अब प्राथमिक विकल्प बनते जा रहे हैं।

-जहां बिजली कटौती अधिक है, वहां डीजल आधारित सिस्टम काम को बिना रुकावट जारी रखने में मदद कर रहा है।

यहां भी नजर आ रहा बदलाव

रेहड़ी और ठेला संचालकों में भी तेजी से बदलाव दिख रहा है। छोटे इंडक्शन स्टोव, बैटरी सपोर्ट और पोर्टेबल जेनरेटर का उपयोग बढ़ा है। इससे ग्राहकों को समय पर सेवा मिल रही है और काम की गति प्रभावित नहीं होती।

चुनौतियां भी मौजूद

-इलेक्ट्रिक उपकरणों में शुरुआती निवेश अधिक

-बिजली दरों में संभावित वृद्धि की आशंका

-डीजल कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव

-तकनीकी रखरखाव और सुरक्षा की बढ़ती जरूरत

-बाजार अब ‘कम लागत, अधिक दक्षता’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।

एक्सपर्ट व्यू : मल्टी-सोर्स मॉडल अपनाने से संतुलित रहती है लागत

ऊर्जा नीति विशेषज्ञ डॉ. अजय माथुर के अनुसार छोटे और मध्यम कारोबार में ऊर्जा उपयोग का ढांचा तेजी से बदल रहा है। एकल ईंधन पर निर्भरता अब जोखिम बढ़ाती है। मल्टी-सोर्स मॉडल अपनाने से लागत संतुलित रहती है और संचालन बाधित नहीं होता। इलेक्ट्रिक और सोलर आधारित तकनीक भविष्य में ज्यादा प्रभावी विकल्प बन सकती है। ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग से 20 से 25 प्रतिशत तक खर्च कम किया जा सकता है। कारोबारियों को चरणबद्ध तरीके से बदलाव अपनाना चाहिए, जिससे निवेश का दबाव नियंत्रित रहे और लंबे समय में बेहतर लाभ मिल सके।