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जैसलमेर में फास्ट फूड की बढ़ती लत: सेहत पर मंडराता खतरा!

स्वर्णनगरी में बच्चों की खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। जहां पहले दाल-बाटी, चूरमा, घी-रोटी और बाजरे की खिचड़ी बच्चों के भोजन का अहम हिस्सा हुआ करते थे, वहीं अब पिज्जा, बर्गर, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स उनकी पसंद बन गए हैं।

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स्वर्णनगरी में बच्चों की खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। जहां पहले दाल-बाटी, चूरमा, घी-रोटी और बाजरे की खिचड़ी बच्चों के भोजन का अहम हिस्सा हुआ करते थे, वहीं अब पिज्जा, बर्गर, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स उनकी पसंद बन गए हैं। बाजार में फास्ट फूड की बढ़ती उपलब्धता ने बच्चों को इसकी ओर आकर्षित कर दिया है, जिससे माता-पिता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। बच्चों के खानपान में फास्ट फूड अब इतना घुल-मिल गया है कि यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। स्कूलों के आसपास मौजूद स्ट्रीट फूड, ब्रांडेड आउटलेट्स और होम डिलीवरी सेवाओं ने इसे और आसान बना दिया है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि जैसलमेर में 40 प्रतिशत बच्चे हर हफ्ते तीन से चार बार फास्ट फूड खाते हैं। इसी तरह 60 प्रतिशत माता-पिता मानते हैं कि उनके बच्चे अब घर का बना खाना कम पसंद करते हैं। स्थानीय निवासी संगीता व्यास बताती है कि पहले बच्चे घर का खाना खुशी-खुशी खाते थे, लेकिन अब वे बाहर के फास्ट फूड की मांग करने लगे हैं। यदि उन्हें रोको, तो वे नाराज हो जाते हैं।

हकीकत: बच्चों की सेहत पर पड़ रहा असर

-फास्ट फूड में अधिक मात्रा में वसा, नमक और चीनी होती है, जिससे बच्चों में स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

  • जैसलमेर में बीते तीन सालों में बच्चों में मोटापे के मामले 15 प्रतिशत बढ़े हैं।

-अधिक तला-भुना खाने से पाचन व पेट की समस्याएं बढ़ रही हैं।

-जंक फूड में पोषण की कमी होती है, जिससे बच्चों की शारीरिक और मानसिक ऊर्जा प्रभावित होती है।

सुखद स्थिति भी

-जैसलमेर के कुछ स्कूलों में "स्वस्थ आहार सप्ताह" मनाया जा रहा है, जिसमें बच्चों को पोषणयुक्त भोजन खाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

-कुछ स्कूलों ने अपनी कैंटीन में जंक फूड पर प्रतिबंध लगाया है।

-बच्चों को पारंपरिक आहार की ओर लौटाने के लिए च्नो जंक फूड डेज् मनाया जा रहा है।

संभव है समाधान भी

-बाजार के फास्ट फूड की बजाय घर पर हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प तैयार करने की जरूरत।

-स्कूलों और समाज में संतुलित आहार के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की दरकार।

-बच्चों के साथ बैठकर भोजन करें, ताकि वे पारंपरिक खाने को प्राथमिकता दे सकें।

-फास्ट फूड को पूरी तरह मना करने की बजाय इसे सीमित मात्रा में दें, ताकि बच्चे बैलेंस्ड डाइट अपना सकें।

एक्सपर्ट व्यू: हर तरह से नुकसानदायक फास्ट फूड

सीएमएचओ डॉॅ. राजेन्द्र कुमार पालीवाल बताते हैं कि फास्टफूड वैसे तो प्रत्येक उम्र के लोगों के लिए नुकसानदायी हैं, लेकिन बच्चों को तो इनसे खास तौर पर दूर रखना चाहिए। ये केवल कार्बोहाइड्रेट से भरे होते हैं और आजकल बच्चों में शारीरिक गतिविधियां बहुत कम हो गई है, तो सुपाच्य नहीं रह जाते। यही कारण है कि बच्चों में फेटी लीवर और शुगर लेवल के उच्च रहने की समस्या सामने आती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को जलवायु के अनुकूल भोजन करवाएं।

पारंपरिक आहार से दूरी क्यों?

फास्ट फूड का आकर्षण और तात्कालिक संतुष्टि बच्चों को पारंपरिक आहार से दूर कर रही है। दाल-बाटी, बाजरे की खिचड़ी, घी-रोटी और हरी सब्जियां जहां पोषण से भरपूर हैं, वहीं फास्ट फूड केवल स्वाद और तृप्ति देता है।