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यहां तो व्यवस्था ईश्वर भरोसे..कलेक्ट्रेट मार्ग पर सड़क को ही बना दिया पार्किंग

जैसलमेर शहर का कलेक्ट्रेट मार्ग इन दिनों भारी अव्यवस्थ का शिकार है। यह मार्ग जहां प्रशासनिक गतिविधियों की धुरी है, वहीं आमजन के लिए रोजाना परेशानी और खतरे की वजह बनता जा रहा है।

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जैसलमेर शहर का कलेक्ट्रेट मार्ग इन दिनों भारी अव्यवस्थ का शिकार है। यह मार्ग जहां प्रशासनिक गतिविधियों की धुरी है, वहीं आमजन के लिए रोजाना परेशानी और खतरे की वजह बनता जा रहा है। सडक़ के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर इसे दो भागों में बांटा गया है—एक ओर आने का रास्ता है और दूसरी ओर जाने का। इसके बावजूद कई वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर शॉर्टकट के चक्कर में गलत दिशा में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे आमने-सामने की टक्कर की आशंका बनी रहती है। यहां से कलेक्ट्रेट, अस्पताल, स्कूल, पुलिस अधीक्षक आवास, डाक बंगला और रामगढ़ मार्ग तक दिन भर सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद सडक़ किनारे बड़े आराम से वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे पूरा रास्ता संकड़ा हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मार्ग पर चंद कदम की दूरी पर ही यातायात पुलिस की चौकी और शहर कोतवाली स्थित है, लेकिन कार्रवाई नाम की नजर नहीं आती। शुक्रवार दोपहर जब यह संवाददाता मौके पर पहुंचा तो कलेक्ट्रेट के समीप सडक़ पर ही वाहन खड़े मिले। कई चार पहिया वाहन उसी लाइन में खड़े थे, जो सिर्फ गुजरने के लिए बनी है।

हकीकत : हर दिन बढ़ रही समस्या, कोई सुध लेने वाला नहीं

कलेक्ट्रेट मार्ग प्रशासनिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां हर दिन अधिकारी, आमजन, विद्यार्थी और मरीज आवागमन करते हैं। इसके बावजूद सडक़ किनारे खड़े वाहनों को हटाने के कोई ठोस प्रयास नहीं हुए। आगामी सितंबर से मार्च तक जैसलमेर में सैलानियों की संख्या बढ़ जाती है। यदि अब भी ट्रैफिक और पार्किंग की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो हालात और ज्यादा खराब होंगे।

खड़ा रहना भी मुश्किल

कलेक्ट्रेट के बाहर खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है। सामने सडक़ पर बाइकें और कारें खड़ी रहती हैं। पास में दुकानों तक ग्राहक नहीं पहुंच पाते। कई बार टक्कर होते-होते बची है।

  • राजूराम पंवार, स्थानीय निवासी

रोज की परेशानी

बच्चों को स्कूल छोडऩे और लाने के दौरान जाम में फंस जाती हूं। कई बार एंबुलेंस भी फंसती देखी है। एक लेन गलत दिशा में वाहन आने से बहुत खतरनाक हो गई है।

-सीमा चौरडिय़ा, स्थानीय निवासी

नियमों की पालना जरूरी

रोजाना अस्पताल जाता हूं। सडक़ पर खड़े वाहनों से निकलना मुश्किल होता है। नियम तो हैं, पर पालना कराने को जिम्मेदार गंभीर नहीं है।

  • जगदीशसिंह, सेवानिवृत कर्मचारी

जिम्मेदार लापरवाह

कलेक्ट्रेट से निकलने के बाद कुछ वाहन सीधे सामने से आ जाते हैं। सडक़ पर डिवाइडर है फिर भी कोई रोकता नहीं। ट्रैफिक वाले पास ही होते हैं लेकिन आंखें मूंदे रहते हैं।

-नरेश कुलश्रेष्ठ, स्थानीय निवासी

टूरिस्ट बंगले की तरफ से आने-जाने वाले पर्यटक सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। आने वाले महीनों में जब सैलानी बढ़ेंगे तो हालात और बिगड़ेंगे।

-भरत लोहार, स्थानीय निवासी

न दिशा तय, न व्यवस्था

हम स्कूल जाते हैं तो कई बार बीच रास्ते में वाहन रोक दिए जाते हैं। न कोई दिशा तय है न कोई व्यवस्था। डर लगता है।

-सुमन पंवार, छात्रा

समाधान भी संभव

-सडक़ किनारे नो-पार्किंग का सख्ती से पालन

-यातायात पुलिस की नियमित गश्त

-अवैध पार्किंग पर चालान और सख्त कार्रवाई

  • वैकल्पिक पार्किंग स्थलों की व्यवस्था

-सीसीटीवी कैमरों से निगरानी