
'लिविंग फोर्ट' के तौर पर ख्याति हासिल कर चुका ऐतिहासिक किला
जैसलमेर. निन्यानवें बुर्जों वाले सैकड़ों वर्ष प्राचीन सोनार दुर्ग ने जैसलमेर शहर को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान दिलाई है। देश और दुनिया में रिहायशी किले के तौर पर प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके सोनार दुर्ग में पुरातत्व विभाग के नियमों तथा पिछले अर्से से जारी प्रशासन की सख्ती की वजह से रहवासियों की पीड़ा बढ़ती जा रही है। दुर्ग में अवैध निर्माण को रोकने के नाम पर अखे प्रोल में पुलिस की अस्थायी चैकी स्थापित है तथा हालत यह हो गई है कि नवनिर्माण तो दूर किसी को अपने घर में अत्यंत आवश्यक छोटा-सा फर्नीचर या मरम्मत संबंधी काम करवाने की आजादी नहीं है। प्रशासन ने दस दिन में पुरातत्व विभाग से निर्माण संबंधी अनुमति दिलाने का जो विश्वास पिछले दिनों दिलाया थाए वह हवाई ही साबित हुआ है। पूरे शहर में वाजिब-गैरवाजिब निर्माणों की निगरानी रखने का कोई तंत्र सक्रिय नजर नहीं आ रहा और सारी पाबंदियां ऐतिहासिक सोनार दुर्ग को संरक्षित रखने वाले बाशिंदों को ही झेलनी पड़ रही है।
चक्कर काटने को मजबूर
जिला प्रशासन की पहल पर नगरपरिषद में सोनार दुर्ग में निर्माण संबंधी अनुमति के लिए अर्जियां लेने की व्यवस्था अवश्य शुरू की गई लेकिन इनमें मंजूरी के लिए दुर्ग के बाशिंदों को चक्कर दर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पुरातत्व विभाग अपने ही बनाए नियमों पर अटल है तो नगरपरिषद के कार्मिक इस कार्य में जरूरी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उनके मुताबिक पहले ही कार्य भार बहुत ज्यादा है। परिषद के अधिकारी भी इस कार्य को प्राथमिकता देने को तत्पर नहीं दिखते। दूसरी ओर दुर्ग में निवास करने वाले कोई बाथरूम का दरवाजा लगवाने तो कोई रसोईघर में जरूरी नल फिटिंग या पत्थर की रैक तक लगाने जैसे निहायत छोटे लेकिन जरूरी कार्य नहीं करवा पा रहे हैं। इससे उनमें रोष पनप रहा है। गौरतलब है कि अस्थायी पुलिस चैकी लगाकर दुर्ग में निर्माण संबंधी कार्यों पर सख्ती से पाबंदी लगाने का विरोध करने पर दुर्गवासियों को प्रशासन की तरफ से आवेदन करने के दस दिन में जरूरी सरकारी मंजूरी दिलाने का भरोसा दिलाया गया था। हालत यह है कि पुरातत्व विभाग की ओर से इतने कागजात मांगे जाते हैं किए लोग औपचारिकताओं को पूरा करने में ही उलझ कर रह गए हैं। कई लोगों को सालों बीत जाने के बाद भी निर्माण संबंधी अनुमति नहीं मिल पाई है।
फैक्ट फाइल
-860 साल से ज्यादा पुराना सोनार किला
-450 घरों से अधिक रिहाइश
-02 वार्ड नगरपरिषद के शामिल है दुर्ग में
परेशान हो रहे दुर्गवासी
किले में रहने वालों को मकान निर्माण संबंधी अनुमति मांगने पर पुरातत्व विभाग की ओर से इतने तरह के कागजात मांगे जाते हैं जो वे पूरे नहीं कर पाते। लोगों को बुरी तरह से परेशान किया जा रहा है। कई.कई साल बीत जाने के बाद भी अनुमति नहीं दी जा रही है।
-सीमा गोपा, पार्षद, वार्ड नं.16, सोनार दुर्ग
आश्वासन पूरा करे प्रशासन
दुर्ग में निर्माण व मरम्मत कार्य के लिए जल्द अनुमति दिलवाने का आश्वासन गत दिनों जिला प्रशासन व नगरपरिषद ने दिया था। हमारी मांग है कि उस आश्वासन को जल्द पूरा किया जाए।
-नेहा व्यास, पार्षद, वार्ड नं. 17, सोनार दुर्ग
Published on:
22 Jan 2021 02:05 pm
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