
ऐतिहासिक दुर्ग झेल रहे हैं, विभागीय तालमेल का खामियाजा
जैसलमेर. सैकड़ों घरों की बस्ती और हजारों लोगों के निवास स्थान के साथ ही विश्व स्तरीय पहचान बना चुके 860 वर्ष पुराने बुजुर्ग किले से सरकारी महकमों ने दूरी सी बना रखी है। यूं तो सोनार दुर्ग की विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान है। साथ ही यह नगरपरिषद के वार्ड संख्या 4 के रूप में भी जाना जाता है। बावजूद इसके पुरातत्व हो या जिला प्रशासन, नगरपरिषद हो या रूडीप, जलदाय हो या दूरसंचार, कई सरकारी महकमें दुर्ग में दखल देते है, लेकिन उनमें कथित तौर पर तालमेल का अभाव है। इसका खामियाजा भुगतते है दुर्ग के बाशिंदे। यहां 90 के दशक में सोनार दुर्ग में बिछाई गई सीवरेज लाइन की समस्या किसी से छिपी हुई नहीं थी। हालांकि वर्षों बाद रूडीप ने फिर से यह कार्य कराया, लेकिन समय-समय पर इसमें समस्याएं आती रहती है। गौरतलब है कि दुनिया के लिविंग फोर्ट की फेहरिस्त में शामिल सोनार दुर्ग में हमेशा से सैलानियों का यहां होटलों व विश्राम गृहों में ठहरने का रूझान रहा है। देश के कोने-कोने से आने वाले सैलानी ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आने वाले सैलानी यहां ठहरने में रूचि दिखाते है।
तो क्या कचरे की झांकी देखने आएंगे मेहमान
यूं तो सोनार दुर्ग में नगरपरिषद के अलावा कई संस्थाओं ने सफाई व्यवस्था का बीड़ा उठाया, कचरा संग्रहण के लिए कचरापात्र भी रखवाए, लेकिन अभी भी सफाई में कई कमियां देखी जा सकती है। पर्यटन स्थलों पर रखी डस्टबीन कचरे से भर जाते है और छलकते रहते हैं। इनके बाहर कचरा बिखरा रहता है। उधर दुर्ग के दशहरा चौक में जमा कचरे और उसे एकत्रित कर ले जाती लोडिंग टेक्सी से सैलानियों को काफी निराशा दिखाई देती है। फिर सुरक्षा किसके भरोसे दुर्ग में सैलानियों के साथ अनजान चेहरों की आवाजाही का दौर बना रहता, ऐसे में सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजमी है। निराशाजनक बात यह है कि सोनार दुर्ग में आवाजाही करने वाले लोगों पर निगरानी रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रभावी प्रयास नहीं दिख पा रहे है।
Published on:
15 Sept 2018 12:18 pm
