1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

200 साल पहले वीरान गांव, हर साल आते हैं 70 हजार सैलानी, अद्भुत है गांव की गाथा

वर्ष 1825 में पालीवाल ब्राह्मणों (Paliwal Brahmins) की ओर से रातोरात खाली किया गया कुलधरा गांव (kuldhara village ) मौजूदा समय में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उन्नत सभ्यता-संस्कृति की वजह से जैसलमेर आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों का पसंदीदा ठौर बन चुका है।

2 min read
Google source verification
history of kuldhara village jaisalmer rajasthan

जैसलमेर। वर्ष 1825 में पालीवाल ब्राह्मणों की ओर से रातोरात खाली किया गया कुलधरा गांव मौजूदा समय में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उन्नत सभ्यता-संस्कृति की वजह से जैसलमेर आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों का पसंदीदा ठौर बन चुका है। सम सेंड ड्यून्स जाने वाले हजारों सैलानी कुलधरा देखने का मोह नहीं छोड़ पाते। इस गांव से कई मिथ्या धारणाएं भी जोड़ दी गई हैं। इसके चलते इसे आत्माओं का गांव या भूतहा कहने वालों की कमी नहीं, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि यहां पहुंचने के बाद पता चलता है कि सैकड़ों साल पहले पालीवाल समाज कितना संपन्न, कुशाग्र और रहन-सहन के मामले में ऊंची पसंद रखता था।

अद्भुत है गांव की गाथा
जैसलमेर से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे कुलधरा गांव की वैज्ञानिक तथा वास्तु नियमों के आधार पर की गई बसावट और इसे बसाने वाले समाज की उत्कृष्ट सोच के बारे में विचार कर दर्शक हैरत में पड़ जाते हैं। यहां साल भर देशी-विदेशी सैलानियों का हुजूम यहां उमड़ता है। एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष 70 से 80 हजार सैलानी कुलधरा पहुंचते हैं। पालीवाल ब्राह्मण 13वीं सदी में राजस्थान के पाली जिले से विस्थापित होकर जैसलमेर आए थे। यहां उन्होंने कुलधरा और खाभा के साथ 84 गांवों को बसाया।

जल ही जीवन है
पालीवाल समृद्ध किसान और व्यापारी थे। उन्होंने सैकड़ों साल पहले जल की महत्ता को समझा। वे बरसाती जल को सहेज कर रखते, जिससे उनके बाहुल्य वाले 84 गांवों में कुएं, बावडिय़ां, तालाब और खड़ीन साल भर भरे रहते। पलायन से पहले कुलधरा गांव की आबादी पांच हजार बताई जाती है। यहां प्रत्येक मकान 45 गुणा 70 वर्गफीट का होता। गांव के बीचों बीच कुलदेवी और विष्णु मंदिर का निर्माण करवाया। प्रत्येक घर के ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित मिलती है। इस समय कुलधरा के मकान खंडहरों की शक्ल में मौजूद हैं।

फैक्ट फाइल
-13वीं सदी में पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाया कुलधरा
-1825 में पालीवालों के 84 गांव एक रात में वीरान हुए
-45 किलोमीटर के दायरे में जैसलमेर के आसपास बसे 84 गांव

ग्रामीण पर्यटन का अनूठा उदाहरण
जैसलमेर रियासत का कुलधरा पर्यटन के क्षेत्र में विश्व के मानचित्र पर अपनी अलग से पहचान बनाए हुए हैं, जो ग्रामीण पर्यटन का अनूठा उदाहरण है। कुलधरा नगर बसावट के साथ ही पालीवालों की सभ्यता और संस्कृति का केंद्र बिंदु है, जो पाली वालों के 84 गांव का प्रतिनिधित्व करता है। जैसलमेर के पर्यटन में कुलधरा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
-ऋषिदत्त पालीवाल, इतिहास वेत्ता, जैसलमेर