
स्वच्छंद विचरण की आस, लाई मौत के पास !
जैसलमेर. लॉक डाउन की अवधि में वन्य जीवों के शिकार व हादसों में काल का ग्रास बनने की घटनाएं सामने आई है। कभी बमुश्किल से नजर आने वाले वन्य प्राणी जंगली क्षेत्रों के अलावा रहवासी क्षेत्रों के समीप विचरण करते देखे गए। प्राकृतिक माहौल के बीच सुरक्षा के भ्रम में वन्य जीव व पक्षियों को अठखेलियां करना भारी पड़ गया। गत दिनों सरहदी जिले के रामदेवरा क्षेत्र में चिंकारा हरिणों के शिकार के मामले के खुलासे व हथियारों के साथ शिकारियों के पकड़े जाने की घटना के बाद वन्य जीवों के शिकार की आशंका व उनकी असुरक्षा को लेकर खतरे ने वन्य प्रेमियों को चिंता में डाल दिया। रामदेवरा में शिकार की घटना में चार अवैध हथियार भी आरोपियों के कब्जे से मिले थे। मरु प्रदेश में गत दिनों वातावरण शांत होने से खेत-खलिहान के समीप स्वच्छं विचरण करते हुए पहुंच रहे वन्य जीव समूचे क्षेत्र को जंगली क्षेत्र मानने के भ्रम में शिकारों के चंगुल में फंस रहे हैं। हकीकत यह भी है कि निगरानी तंत्र कमजोर होने से भी यह निराशाजनक स्थिति बनी है। गत तीन महीनों में जहां शासन-प्रशासन का समूचा ध्यान कोरोना संक्रमण को रोकने और पीडि़त मरीजों के इलाज व संदिग्धों के क्वारंटीन पर रहा, वहीं प्राकृतिक माहौल में शांति व सुकून को देखकर विचरण करने वाले वन्य प्राणी शिकारियों के निशाने पर रहे। गौरतलब यह है कि स्वच्छंंद विचरण करने के दौरान कई वन्य प्राणी भारी वाहनों की चपेट में आकर काल का ग्रास भी बने तो कई शिकार की घटनाएं ऐसी भी रही, जिसकी जानकारी ही सामने नहीं आई। सरहदी जिले में वन्य जीव अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अधिकांश मामलों में घटनाओं के आंकड़े ही सामने नहीं आए। उधर, जिम्मेदार विभाग इन घटनाओं को सामान्य ही मान रहा है। उधर, शिकार की घटनाओं का खुलासा होने के बीच पुलिस महकमे के लिए गंभीर चुनौती भी उभरकर आई है। आबादी क्षेत्र के घनत्व की कमी और थाना क्षेत्रों के बीच की दूरी अधिक होने से विषम भौगोलिक क्षेत्र वाले सरहदी जिले में वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर निगरानी रखने में जिम्मेदारों को परेशानी भी आ रही है। शिकार की चर्चित घटनाएं3 अप्रेल - रामदेवरा क्षेत्र में चार चिंकारा हरिणों का शिकार19 अप्रेल - नोख क्षेत्र के भारमसर में चार तीतर का शिकार-26 अप्रेल - रामगढ़ क्षेत्र में दो चिंकारा हरिणों का शिकार एक्सपर्ट व्यू- अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा के तहसील संयोजक राधेश्याम पेमानी के अनुसार पूरे अप्रेल महीने में शिकार की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह लॉक डाउन में जीवों का स्वच्छंद विचरण और आमजन का आवागमन कम होना रहा है। ऐसे में शिकारियों को सुगमता से शिकार करने का मौका हाथ लग गया। इसके अलावा एक अन्य वजह सरकारी तंत्र की शिथिलता भी रही।
कर रहे कड़ी कार्रवाई
वन-विभाग की टीम मुस्तैद है। लॉक डाउन के दौरान पब्लिक मूवमेंट कम होने से शिकार की वारदातों को अंजाम देने में आरोपी सफल रहे, लेकिन रामदेवरा व रामगढ़, दोनों ही मामले में आरोपियों को गिरफतार किया गया है। शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
बेगामराम चौधरी, उपवन संरक्षक, जैसलमेर
Published on:
30 Jun 2020 10:03 pm
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