
मरुस्थलीय अंचल के ताड़ाना गांव में 17 वर्षों से अधूरी पड़ी डामर सड़क अब विकास की नई उम्मीद बनकर उभरी है। ग्रामीणों ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना की 1325 आरडी से ताड़ाना तक आठ किलोमीटर पक्के मार्ग की स्वीकृति की मांग तेज कर दी है, ताकि गांव को नाचना–मोहनगढ़ लिंक रोड से सीधा जोड़ा जा सके और वर्षों पुरानी आवागमन समस्या का समाधान हो। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से उठती रही, लेकिन फाइलों से आगे बात नहीं बढ़ी। इस वर्ष सार्वजनिक निर्माण विभाग ने प्रस्तावित मार्ग का रोडमैप तैयार किया है।
इसी पहल ने गांव में नई उम्मीद जगाई है। यदि प्रशासनिक स्वीकृति मिलती है तो अधूरा सपना साकार हो सकता है। ताड़ाना गांव जिला मुख्यालय जैसलमेर से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित है। नाचना–मोहनगढ़ लिंक रोड से दूरी मात्र 12 किलोमीटर है, फिर भी पक्की सड़क के अभाव में ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। कच्चे रास्ते पर ट्रैक्टर और छोटे वाहन रेत में धंस जाते हैं। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।
यह है स्थिति
कुल 12 किलोमीटर मार्ग में से चार किलोमीटर डामर सड़क पूर्व में बन चुकी है। शेष आठ किलोमीटर का निर्माण पूरा होते ही गांव सीधे मुख्य सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 50 किलोमीटर कम हो सकती है। परिवहन लागत घटेगी और समय की बचत होगी। लिंक रोड के आसपास किसानों की अधिकांश कृषि भूमि स्थित है। सड़क अभाव में खाद, बीज, कृषि यंत्र और उपज के परिवहन में अतिरिक्त खर्च और श्रम लगता है। बरसात या आंधी के दौरान हालात और कठिन हो जाते हैं। नियमित सड़क सुविधा मिलने से खेती-किसानी को गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
राज्य बजट में ग्रामीण सड़कों को प्राथमिकता दिए जाने की घोषणा के बाद ताड़ाना के लोगों में विश्वास बढ़ा है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस वर्ष प्रस्ताव को स्वीकृति मिलेगी और सत्रह वर्षों से अधूरी पड़ी डामर सड़क अंततः पूर्णता तक पहुंचेगी।
Published on:
22 Feb 2026 08:22 pm
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