
घुड़ दौड़ प्रतियोगिता का हुआ आयोजन, दिखा उत्साह
लाठी. आधुनिकता की चकाचौंध में पर्व मनाने के मायने भले ही बदल गए हो, लेकिन सोढाकोर गांव में दीपावली पर्व पर रियासतकाल से चली रही घुड़ दौड़ की परंपरा आज भी निभाई जाती है। राजा-महाराजाओं के समय से चली रही इस परंपरा को आज भी बखूबी निभाया जाता है। इसे देखने के लिए ना केवल स्थानीय बल्कि आस.पास के गांवों से भी सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। उत्साह इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसमें भाग लेने के लिए घुड़सवार कई महीनों पहले ही अभ्यास शुरू कर देते हैं। प्रतियोगिता के लिए घोड़ों को भी पूरी तरह तैयार किया जाता है। दिलचस्प बात तो यह है कि इस दौड़ का आयोजन भी ग्रामीण अपने स्तर पर करते हैं। प्रतियोगिता में अव्वल आने वाले घोड़े सवार को पुरस्कृत किया जाता है। क्षेत्र के सोढ़ाकोर गांव में दीपावली के दूसरे दिन गांव के पूर्व सैनिक कूम्पसिंह भाटी व सामाजिक कार्यकर्ता लुणसिंह भाटी की ओर से रियासतकाल से चली रही घुड़ दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। घोड़ा मैदान में आयोजित प्रतियोगिता में शामिल घोड़ों ने दौड़ लगाई तो वहां मौजूद हर शख्स की एकबारगी सांसें ही ठहर गईं। रामा-श्यामा के दिन दोपहर 4 बजे घुड़ दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के दौरान सोढ़ाकोर सहित आसपास क्षेत्र के क्षेत्रों से घुड़सवार सवारों ने भाग लिया। घोड़ा रेस के दौरान लूणा गांव के बुधसिंह ने रेस जीतकर बाजी मारी, वहीं सोढ़ाकोर गांव रूपसिंह पुत्र अचलसिंह ने दूसरे स्थान पर जगह बनाने मे सफलता अर्जित की। सोढाकोर गांव के अगरसिंह पुत्र रेवतसिंह का घोड़ा तीसरे स्थान पर रहा।
विजेताओं को किया पुरस्कृत
गांव में आयोजित घोड़ा रेस प्रतियोगिता में विजेताओं को आयोजनकर्ताओं की ओर से इनाम देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता उमरावसिंह, पूर्व सैनिक लखसिंह भाटी, कंवराजसिंह राठौड़, डॉ. भोमसिंह, विक्रमसिंह, जितेंद्रसिंह, प्रयागंिह, भंवरसिंह, रुपसिह, शैतानसिंह, अगरसिंह, कंवराजसिंह, हुकमसिंह, मुकेश राठी, रावलसिंह, डॉ. भोमसिंह, दातारसिंह सहित कई जने मौजूद थे।
उत्साह से लेते है प्रतिभागी भाग
आयोजनकर्ता कुम्पसिंह भाटी ने बताया कि कई वर्षों से चली रही इस परंपरा में उत्साह से भाग लेते हैं। इस प्रतियोगिता के आयोजन के कई मायने हैं। अव्वल रहने वाले घुड़सवार के साथ उसके घोड़े का नाम भी क्षेत्र में प्रसिद्ध होता है। भविष्य में जब घोड़े का मालिक अपना घोड़ा बेचता है तो जैसी नस्ल वैसे दाम वाली बात के आधार पर घोड़ों की बिक्री होती है। दौड़ में शामिल होने वाले घोड़ों के नाम भी मशहूर होते हैं। इस दौड़ में शामिल होने वाले किसी घोड़े का नाम लाल बुलेट तो किसी का बादल होता है तो किसी को सुल्तान नाम से पुकारा जाता है। दौड़ में जो घोड़ा अव्वल रहता है, उसका नाम पूरे क्षेत्र के लोगों की जुबान पर रहता है।
Published on:
07 Nov 2021 12:29 pm
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