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मैं जैसलमेर… सब मिलकर संवारे सोने-से जैसलमेर को

जैसलमेर. पीत पाषाणों से निर्मित जैसलमेर शहर का मूर्तिमान सौन्दर्य देश-दुनिया के सैलानियों को दशकों से रिझाता चला आ रहा है। इस ऐतिहासिक नगर के कण-कण में सुंदरता के साथ सदियों का इतिहास सांस लेता है। पिछले कुछ अर्से के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों को सजाने-संवारने के लिए जैसा काम सरकारी स्तर पर होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया।

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मैं जैसलमेर... सब मिलकर संवारे सोने-से जैसलमेर को

मैं जैसलमेर... सब मिलकर संवारे सोने-से जैसलमेर को

जैसलमेर. पीत पाषाणों से निर्मित जैसलमेर शहर का मूर्तिमान सौन्दर्य देश-दुनिया के सैलानियों को दशकों से रिझाता चला आ रहा है। इस ऐतिहासिक नगर के कण-कण में सुंदरता के साथ सदियों का इतिहास सांस लेता है। पिछले कुछ अर्से के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों को सजाने-संवारने के लिए जैसा काम सरकारी स्तर पर होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया। आमजन भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। विशेषकर वे जिनके कंधों पर शहर की विरासत को अक्षुण्ण रखने का दायित्व माना जाता है। राजस्थान पत्रिका ने इस संबंध में शासन-प्रशासन और आमजन को जगाने की पहल की है। शहर को सुंदर बनाने की जिम्मेदारी को सरकारी तंत्र भी महसूस कर रहा है और जिम्मेदार शहरी भी।

रोक-टोक करने का तंत्र प्रभावी हो
स्वर्णनगरी जैसलमेर में पिछले कुछ अर्से के दौरान एक तरह की उदासीनता पसरी हुई दिखाई देती है। चाहे कितनी भी अव्यवस्थाएं हो, कहीं कोई हलचल नहीं दिखती। इसका एक कारण तो यह भी है कि ज्यादातर अफसर बाहरीपन दिखाते हैं और जनता के चुने हुए प्रतिनिधि, अगंभीर बने हुए हैं। जबकि होना यह चाहिए कि, जहां भी नियम-कायदों की अवहेलना हो, कानून का डंडा अपना असर दिखाए। इससे गड़बड़ी करने वाले लोगों में एक तरह का मजबूत संदेश जाएगा।
- आईदानसिंह भाटी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, भाजयुमो

सभी निभाएं अपनी जिम्मेदारी
जैसलमेर शहर को जीवित संग्रहालय कहा गया गया है। यह राजस्थान ही नहीं, देशभर में अपनी तरह का अनोखा नगर है। इसकी सुंदरता अक्षुण्ण रहे और यहां के बाशिंदे सुविधाजनक परिस्थितियों में जीवन यापन करें, यह बहुत आवश्यक है। ऐसा तभी संभव होगा, जब केवल सरकारी तंत्र के भरोसे न रहकर हर किसी को अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। एक मशीन तभी पुख्ता ढंग से चलती है, जब उसका हर एक पुर्जा सही ढंग से काम करे।
- मयंक भाटिया, पर्यटन व्यवसायी

शहर की रीढ़ है पर्यटन
स्वर्णनगरी जैसलमेर की अर्थव्यवस्था के साथ यहां के सांस्कृतिक वैभव को दुनिया भर में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए पर्यटन की भूमिका अहम है। इस मायने में पर्यटन को सम्बल प्रदान करने के लिए जैसलमेर में आमूलचूल बदलाव लाने की आवश्कता है। पर्यटकों के आकर्षण में बढ़ोतरी के लिए ऐसे सौन्दर्यकरण से परिपूर्ण कार्य करवाए जाएं जिससे स्वर्णनगरी का नाम और ज्यादा रोशन हो। पर्यटन के क्षेत्र में नए आयाम हासिल करने की जैसलमेर में अपरिमित संभावनाएं हैं।
- निर्मल पुरोहित, पार्षद एवं समाजसेवी

अब तो टूटे तंद्रा
जैसलमेर एक बहुत खूबसूरत शहर है लेकिन यह खूबसूरती निरंतर कैसे बरकरार रहे, इस पर विचार करने की आवश्यकता है। पहले के जमाने में लोगों ने जीवन यापन के साथ अपने शहर की सुंदरता को बनाए रखने में जिम्मेदारी का निर्वहन किया। सरकारी अधिकारी भी इस कार्य में पीछे नहीं रहते। वर्तमान परिस्थितियां निराशाजनक नजर आती है। जिम्मेदारों की तंद्रा टूटने का नाम नहीं ले रही है। जो भी व्यवस्था बिगाड़े और शहर की सुंदरता, इसकी विरासत को बदरंग करे, उस पर सख्ती से कार्रवाई की जाए।
- मेघराज परिहार, होटल व्यवसायी