
जाएं तो कहां जाएं, कोई सुनेगा इनकी फरियाद !
जैसलमेर. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दसवीं के नतीजे आ गए हैं। जैसलमेर में एक बार फिर अंग्रेजी माध्यम से सीबीएसई से 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले स्थानीय विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों के सामने 11वीं कक्षा में मनचाहे विषय में अध्ययन के लिए प्रवेश को लेकर संकट के हालात उत्पन्न हो गए हैं। जैसलमेर में ऐसे विद्यार्थियों के लिए आगे पढ़ाई के बहुत सीमित साधन होने से यह समस्या वर्षों से चली आ रही है। इस बार कोरोना संकट के कारण यह विषय और गंभीर हो गया है। जानकारी के अनुसार जैसलमेर में अंग्रेजी माध्यम में कक्षा 11 में पढ़ाई करवाने की व्यवस्था एकमात्र निजी स्कूल में है। बताया जाता है वहां भी केवल वाणिज्य विषय पढ़ाया जाता है और वह भी पिछले सत्र तक केवल लड़कियों के लिए यह सुविधा प्रदान कर रहा था। ऐसे में सभी विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों की उम्मीद डाबला और जैसलमेर के एयरफोर्स स्टेशन में संचालित केंद्रीय विद्यालय पर टिकी हैं। केवी डाबला में भी कक्षा 11 व 12 में वाणिज्य तथा विज्ञान संकाय ही है। यदि किसी विद्यार्थी को कला संकाय में अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाना है तो उसके लिए केवल केवी एयरफोर्स का आसरा है। इन दोनों केंद्रीय विद्यालयों में नियमानुसार वरीयता क्रम के हिसाब से विद्यार्थियों को प्रवेश मिलता है। यहां प्रवेश का पहला हक सैन्य और अद्र्धसैनिक बलों में कार्यरत लोगों के बच्चों को, बाद में केंद्रीय विभागों में कार्यरत कार्मिकों के लड़के-लड़कियों के लिए निर्धारित है। तीसरी वरीयता में राज्य कर्मचारी आदि आते हैं। जो स्थानीय विद्यार्थी किसी वरीयता क्रम में शामिल नहीं हैं, वे 10वीं कक्षा में 90 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा अंक लाकर भी सीट खाली रहने का इंतजार करने के लिए विवश रहते हैं।
बाहर भेजने की भी स्थिति नहीं
इस वर्ष देशभर में कोरोना संक्रमण के हालात हैं। इसके चलते स्थानीय बाशिंदे अपने बच्चों उच्च माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ाई के लिए बाहरी शहरों में भेजने से भी कतरा रहे हैं। उसके अलावा अभी तक यह तय भी नहीं है कि विद्यालयों में नियमित अध्ययन कब से शुरू होगा। लिहाजा बीसियों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह अंकित हो गया है।
मुसीबत में फंसे हम
अंग्रेजी माध्यम से 10वीं की पढ़ाई करने के बाद अग्रिम अध्ययन की कोई माकूल व्यवस्था जैसलमेर में नहीं होने से हम बेहद मुश्किल में हैं। हमारे बच्चे पढ़ाई में तेज होने के बावजूद कुंठित होने के लिए मजबूर हैं। केंद्र सरकार को इस समस्या का निराकरण करवाना चाहिए।
- संजय बींझाणी, अभिभावक
Published on:
24 Jul 2020 04:52 pm
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