11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

 पशुपालन बाहुल्य सरहदी जिले में गोवंश पर मंडरा रहा कर्रा रोग का जानलेवा संकट

पशुपालन बाहुल्य वाले जैसलमेर जिले में गोवंश पर एक बार फिर कर्रा रोग का जानलेवा संकट मंडरा रहा है और प्रशासन के अपने आंकड़े के अनुसार अब तक करीब 200 गोवंश की जान इस बीमारी ने ले ली है।

2 min read
Google source verification

पशुपालन बाहुल्य वाले जैसलमेर जिले में गोवंश पर एक बार फिर कर्रा रोग का जानलेवा संकट मंडरा रहा है और प्रशासन के अपने आंकड़े के अनुसार अब तक करीब 200 गोवंश की जान इस बीमारी ने ले ली है। वहीं गैरसरकारी आंकड़ा इससे ज्यादा का ही है। बीमारी से संक्रमित पशु की हड्डी या चमड़ी चाटने से दूसरे पशु तक पहुंचने वाले इस रोग से बचाव के लिए जिला प्रशासन की तरफ से निगरानी रखी जा रही है। बीते दिनों पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने जैसलमेर का दौरा कर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर से प्रशासन के आला अधिकारियों से लेकर ग्राम पंचायतों के सरपंचों तक को कर्रा के फैलाव को रोकने के लिए बनाए सिस्टम में शामिल किया है। दूसरी ओर पदों की मार से त्रस्त पशुपालन विभाग की ओर से सीमित साधनों से बेहतरीन काम करने का दावा किया जा रहा है। फिर भी इस बीमारी से गोवंश को उनके पालकों की जागरुकता ही बचा सकती है।

बचाव ही उपचार

  • भीषण गर्मी के मौसम में कर्रा रोग तेजी से फैल रहा है और अब तक इस रोग की कोई दवाई या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।
  • पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी गायों को खुले में न छोड़ें।
  • ट्यूबवैल और नहरी क्षेत्र में खेती के साथ पशुपालन करने वालों को सलाह दी गई है कि वे जितना हो सके, गायों को हरा चारा खिलाएं। इसके अलावा उन्हें संतुलित खाद्य उपलब्ध करवाएं।
  • गोवंश में जैसे ही कर्रा के लक्षण दिखाई दे, उनके पालकों को सलाह दी गई है कि वे उन्हें लिक्विड चारकोल पिलाएं। ऐसा करने से गाय के पेट में टॉक्सिन का फैलाव रुक जाता है और वे मौत की कगार तक नहीं पहुंचती।
  • अधिकारियों को ग्राम पंचायत स्तर तक निगरानी तंत्र मजबूत करने, विकास अधिकारियों के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग करने, सोशल मीडिया, विज्ञापन, होर्डिंग, एलइडी वॉल जैसे माध्यमों से जन-जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।इसलिए फैल रहा कर्रापशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में उत्पादित चारे में फास्फोरस की कमी है। इसके अलावा दुधारू गायों में दूध उत्पादन के चलते पोषक तत्वों की कमी होने पर वे मृत पशुओं की हड्डियां चबाने लगती हैं, जिससे कर्रा रोग फैलता है। कर्रा से बचाव के लिए जिले के सभी पशु चिकित्सालयों और उपकेंद्रों में मिनरल मिक्सर पाउडर उपलब्ध करवाया गया है।
  • पशुपालकों को सलाह दी गई कि वे प्रतिदिन 50 ग्राम मिनरल मिक्सर पाउडर को नमक दाने में मिलाकर अपने गोवंश को खिलाना सुनिश्चित करें।पूर्ण तत्परता से किया जा रहा कार्यजिले में गोवंश को कर्रा से बचाने के लिए जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था में पूरी तत्परता से कार्य किया जा रहा है। मृत पशु को सुरक्षित ढंग से गड्ढा कर दफनाने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत के सरपंच को दी गई है। विभाग में अनेक पद रिक्त होने के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है। विभाग की 22 में से 10 मोबाइल एम्बुलेंस यूनिट इस काम में जुटी हैं। 10 पशु चिकित्सक जल्द मिलने वाले हैं।
  • डॉ. उमेश वरंगटिवार, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग जैसलमेर