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रेगिस्तान में सूर्य ने तानी भृकुटी तो कुपित हुए नागराज

-सर्पदंश के बढऩे लगे मरीज, सर्वाधिक मामले नहरी क्षेत्र के-गर्मी व नमी के मौसम में स्वच्छंद विचरण कर उगल रहे जहर

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रेगिस्तान में सूर्य ने तानी भृकुटी तो कुपित हुए नागराज

रेगिस्तान में सूर्य ने तानी भृकुटी तो कुपित हुए नागराज

दीपक व्यास/गिरधारीलाल लोहिया
जैसलमेर/मोहनगढ़. पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले में तापमापी पारा 40 डिग्री पार करने के साथ ही सर्पदंश के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तपती मरुधरा में सर्पों का स्वच्छंद विचरण बढ़ा है। सर्वाधिक मामले ग्रामीण क्षेत्र, विशेषकर नहरी क्षेत्र में दर्ज किए जा रहे हैं। आमतौर पर सर्दी के दिनों में सर्प अपने बिलों में छिपे रहने वाले नागराज इन दिनों जहर उगल रहे हैं और सर्प दंश के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। भीषण गर्मी के दौरान सर्प बिलों से बाहर निकलते हैं आहार के लिए और इस दौरान दुर्भाग्यवश स्थानीय बांशिंदे उनका शिकार बन जाते हैं। इन दिनों सर्पदंश के जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें विषैले व विषहीन, दोनों तरह के सर्प शामिल है। अब तक जो सर्पदंश के मामले सामने आए हैं, वे अधिकांशत: कम आबादी वाले रेतीले व सूने क्षेत्रों से संबंधित हैं, जहां सर्पों का विचरण अधिक रहता है। खेतों में फसलों की बीजाई से लेकर पकने तक किसानों की ओर से खेतों में पानी दिया जाता है। बिलों में पानी भरने के कारण सांप बिलों से बाहर निकल जाते है। इसके अलावा फसलों की कटाई करने के बाद काटकर इक_ा की गई फसलों में नमी के रहती है, जिसमें सांप घुस जाते है। ऐसे में फसलों को उठाने के दौरान सांप डस लेते है। कई बार पशुओं को चराने के दौरान भी चरवाहों को सांप डस लेते है। ऐसे में सर्पदंश की घटनाओं में आए दिन इजाफा होता जा रहा है। चिकित्सक बताते हैं कि सांप काटने से पीडि़त व्यक्ति का स्नायु तंत्र प्रभावित हो जाता है और हाथ पैर फूल जाते हैं। सर्पों नमी के माहौल में अधिक बाहर निकलते हैं। सिंचाई के दौरान पानी बिलों में भरने से सांप बिलों से बाहर निकल आते है, जिससे सर्पदंश की घटनाओं में इजाफा हो जाता है। इन दिनों नहरी क्षेत्र में बांडी, गोरावा व सिग नामक सांप के काटने के मरीज मोहनगढ़ के अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे है।
आहत मरीजों को यहां राहत
गौरतलब है कि मरूस्थलीय क्षेत्र में ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन व कृषि है। जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर के आने से यहां कृषि कार्यों में बढ़ोतरी हुई है। खेत में कार्य करने व पशुओं को चराने के दौरान किसानों व चरवाहों को सांप डस लेते है। तबीयत बिगडऩे पर परिजन मरीज को मोहनगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आते है। जहां पर सर्पदंश के मरीज का उपचार किया जा रहा है। सर्पदंश के मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल में एएसवी इंजेक्शन नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

अब तक 167...
मोहनगढ़ नहरी क्षेत्र में जनवरी 2020 से लेकर 16 अप्रेल 2022 तक 167 जनों को सांप डस चुके है। वर्ष 2020 में 75, वर्ष 2021 में 71 जनों को सांप ने डसा है। जनवरी 22 में एक, फरवरी 22 में तीन, मार्च 22 में 7 तथा अप्रले महीने में पहले 16 दिनों में 11 सर्पदंश के मामले सामने आ चुके हैं। सर्पदंश के मरीजों को उपचार के लिए नहरी क्षेत्र में स्थित मोहनगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जाता है। यहां चिकित्सकों की ओर से मरीजों का समय पर उपचार किया जा रहा है। मोहनगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कीटनाशक व सर्पदंश के मरीज दूर दराज के इलाकों से पहुंच रहे है। जिले के अलावा अन्य जिलों से भी सर्पदंश के मरीजों को उपचार के लिए मोहनगढ़ लाया जाता है।

एक्सपर्ट व्यू

रेगिस्तान में यह सावधानी भी जरूरी: पंवार
मोहनगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधिकारी डॉ. केआर पंवार बताते हैं कि सर्पदंश के मरीजों के लिए अस्पताल में नि:शुल्क इंजेक्शन उपलब्ध करवाए जा रहे है, जिसकी बाजार में प्रति इंजेेक्शन की कीमत लगभग 1000 रुपए के करीब है। किसी जहरीले सांप के काटने या कोबरा सांप के काटने के मरीजों के अधिकतम 135 तक एएसवी इंजेक्शन लगाए जाते है।

-खेत में कार्य करने के दौरान लम्बी स्लीज वाले जूते पहनने की जरूरत।
-रात्रि में टॉर्च का उपयोग करने की दरकार।
-फसलों को पानी पिलाने व फसलों की कटाई के दौरान विशेष ध्यान रखने की दरकार।
-काटकर एकत्रित की गई फसलों को उठाने के दौरान सावधानी जरूरी।
-नमी वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।

सर्पदंश के बाद भी सावधानी जरूरी: राठौड़
सर्पदंश के बाद भी कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती है। इस संबंध में चिकित्साधिकारी डॉ. केसरसिंह राठौड़ का कहना था कि सर्पदंश के बाद मरीज को कुछ बातों को ध्यान देना जरूरी है।

-सांप के काटने के स्थान पर ब्लेड से चीरा नहीं लगाएं।
-जिस स्थान पर सांप ने डसा है। वहां पर किसी भी रस्सी या धागे या कपड़े से कस कर नहीं बाधे।
-ब्लेड से चीरा लगाने की स्थिति में घाव से अधिक खून बहने की संभावना बढ़ जाती है।
-सांप के डसने के बाद उपचार के लिए अस्पताल आना चाहिए।
-किसी प्रकार के झाड़़़-फूंक के लिए भोपा बाबा के पास नहीं जाएं।
-कोबरा सांप सबसे जहरीला होता है। कोबरा के डसने पर उपचार के लिए शीघ्र अस्पताल पहुंचे।

विगत दस दिनों का तापमान
दिन अधिकतम तापमान(सें.)
10 अप्रेल 43.5
11 अप्रेल 42.0
12 अप्रेल 40.4
13 अप्रेल 39.4
14 अप्रेल 42.3
15 अप्रेल 42.6
16 अप्रेल 43.5
17 अप्रेल 43.5
18 अप्रेल 42.5
19 अप्रेल 42.0