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भीषण गर्मी में बिजली की आंख-मिचोली बढ़ा रही शहरवासियों की पीड़ा

स्वर्णनगरी इन दिनों भीषण गर्मी और अनियमित विद्युत आपूर्ति की दोहरी मार झेल रही है।

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स्वर्णनगरी इन दिनों भीषण गर्मी और अनियमित विद्युत आपूर्ति की दोहरी मार झेल रही है। बुधवार को एक बार फिर शहरवासियों को दिनभर बिजली की आंख-मिचोली का सामना करना पड़ा। सोनार दुर्ग से लेकर शहर के कई भागो में बिजली की आवाजाही का दौर बना रहा। ऐसे में आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बिजली संकट के चलते ना केवल घरों में पंखे और कूलर बंद पड़े रहे, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिम्मेदार विभागों की ओर से बैठकों में दिए जाने वाले निर्देश भी महज कागजी साबित हो रहे हैं, क्योंकि स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। गर्मी के इन दिनों में जब पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, ऐसे में बार-बार बिजली गुल होना आमजन के लिए नारकीय पीड़ा बन चुका है।

फोन पर नहीं मिलता जवाब

दिन में तीन-तीन बार बिजली चली जाती है, और लौटती भी है तो वोल्टेज इतना कम होता है कि पंखा तक नहीं चल पाता। जब विभाग के अधिकारियों को फोन करते हैं तो कोई जवाब नहीं मिलता। अब तो समझ ही नहीं आ रहा कि अपनी परेशानी किसे बताएं।

-बसंत कुमार, स्थानीय निवासी

स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
गर्मी के कारण बच्चों की तबीयत खराब हो रही है। घर में बूढ़ी अम्मी हैं, जिनके लिए गर्मी जानलेवा बन रही है। लाइट गई तो दो-दो घंटे नहीं आती। सरकार कहती है कि 24 घंटे बिजली दे रहे हैं, लेकिन हमसे पूछिए असलियत क्या है।

दुर्गवासियों की बढ़ रही पीड़ा

दुर्ग के भीतर रहने वाले लोग गर्मी से परेशान हो रहे हैं। बिजली जाती है तो यहां रहने वाले लोगों की पीड़ा बढ़ जाती है। जिम्मेदारों को कम से कम ऐसे पर्यटन सीजन में बेहतर बिजली व्यवस्था करनी चाहिए
- गोकुल चंद्र, दुर्गवासी, जैसलमेर

हाल बड़ा बेहाल है...

महीनों से यही हाल है। बिजली कब आएगी, कब जाएगी—कुछ तय नहीं। नलों में पानी भी बिजली से आता है, तो जब लाइट नहीं होती, तब पानी भी नहीं मिलता। छोटे बच्चे गर्मी में बिलबिला जाते हैं।

पूनम आहूजा, स्थानीय निवासी

कौन सुनेगा, किसको सुनाएं

बार-बार की शिकायतों और जनप्रतिनिधियों की बैठकों में आश्वासनों के बावजूद अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। शहर में ट्रिपिंग और ओवरलोड की समस्या को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई न के बराबर नजर आती है।