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ब्रह्मसर महातीर्थ में दीक्षा समारोह, दो नूतन साध्वियों ने पाया साध्वी पद

कुशल धाम ब्रह्मसर दादावाड़ी में नूतन साध्वियों की दीक्षा संपन्न हुई। आचार्य जिन मनोज्ञसूरीश्वर महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

•

Updated: 15 Mar 2026, 7:49 PM IST

कुशल धाम ब्रह्मसर दादावाड़ी में नूतन साध्वियों की दीक्षा संपन्न हुई। आचार्य जिन मनोज्ञसूरीश्वर महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।

दीक्षा समारोह में आचार्य पूर्णानंद सूरीश्वर महाराज, मुनि नयज्ञसागर महाराज, साध्वी गणिनी सुभद्रा महाराज सहित साध्वी वृंद की उपस्थिति रही। दादा जिन कुशल सूरि ट्रस्ट ब्रह्मसर के तत्वावधान में साध्वी समर्पणप्रज्ञा महाराज और साध्वी संकल्पप्रज्ञा महाराज की बड़ी दीक्षा का विधान संपन्न हुआ। समवशरण में स्थापित चौमुखी परमात्मा प्रतिमा की साक्षी में मुख्य धार्मिक विधान संपन्न किया गया।
ट्रस्ट के सहमंत्री विजय सिंह कोठारी के अनुसार प्रातः शुभ मुहूर्त में गुरू भगवंतों के सान्निध्य में दीक्षा प्रक्रिया प्रारंभ हुई। धर्मसभा में आचार्य जिन मनोज्ञसूरीश्वर महाराज ने कहा कि दोनों साध्वियों ने पंच महाव्रतों का प्रत्याख्यान स्वीकार कर पूर्ण साध्वी पद प्राप्त किया है। संयम, तप और साधना का मार्ग आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण साधन है। धर्मसभा में आचार्य पूर्णानंद सूरीश्वर महाराज सहित साध्वी वृंद ने संयम जीवन के महत्व पर विचार व्यक्त किए। गणिनी साध्वी प्रियदर्शना महाराज की शिष्या नूतन साध्वी समर्पणप्रज्ञा ने कहा कि दीक्षा दुख से सुख, विराधना से आराधना, आडंबर से सादगी और जीव से शिव प्राप्ति का मार्ग है। परमात्मा महावीर का वेश धारण करने के बाद भीतर दिव्य ऊर्जा का अनुभव हो रहा है।

साध्वी शशिप्रभा महाराज के समुदाय की नूतन साध्वी संकल्पप्रज्ञा ने कहा कि संसार की असारता का बोध होने पर वैराग्य स्वतः उत्पन्न होता है। पूर्ण वैराग्य के साथ संयम जीवन अपनाने पर अलौकिक आनंद का अनुभव हो रहा है। चतुर्विध संघ की उपस्थिति में दोनों साध्वियों ने संयम मर्यादाओं का आजीवन पालन करने की भावना व्यक्त की। माता-पिता के संयम मार्ग अपनाने की अनुमति देने पर आभार भी प्रकट किया।
कार्यक्रम में क्षमाकल्याण महाराज के वासक्षेप से गुरू भगवंतों ने दोनों साध्वियों को आशीर्वाद दिया। सकल संघ ने सामूहिक गुरुवंदन कर नूतन साध्वियों का अभिनंदन किया। साध्वी वृंद ने संघ को प्रथम मांगलिक पाठ का श्रवण कराया। इस अवसर पर ब्रह्मसर ट्रस्ट के ट्रस्टी, जिन कुशल मनोज्ञ महिला मंडल, खरतरगच्छ बालिका परिषद और जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।