
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती आदेश की पालना नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को अगली सुनवाई पर जैसलमेर जिले के सोनार किले के संरक्षण के लिए बनाए गए हेरिटेज उप नियमों को पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सोनार किले की सुरक्षा को लेकर किए गए सर्वे और संरक्षण के उपायों की रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है, जिसमें विफल रहने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक तथा राज्य पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
न्यायाधीश डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ में याचिकाकर्ता सुनील पालीवाल की ओर से अधिवक्ता मानस रणछोड़ खत्री ने कहा कि प्राचीन स्मारक, पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी को प्रत्येक प्राचीन स्मारक के लिए उप-नियम बनाने बाध्यकारी हैं। पिछली सुनवाई पर उप नियमों की प्रति पेश करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसकी अनुपालना नहीं हो पाई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि केंद्र और राज्य सरकार यह यकीन दिलाने में असमर्थ थे कि सोनार किले को लेकर ऐसे उप नियम बनाए गए हैं या नहीं। खंडपीठ ने कहा कि एएसआई के जवाब से स्पष्ट है कि जिम्मेदार सुधारात्मक उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं। हालांकि, केंद्र और राज्य ने सोनार किले का प्रारंभिक सर्वे किए जाने की बात कही, लेकिन सर्वे के नतीजे कोर्ट के समक्ष नहीं रख पाए। यहां तक कि नियमानुसार उप नियमों की प्रति संसद में रखे जाने के प्रावधान की पालना को लेकर भी सही तस्वीर सामने नहीं आई। याचिका की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से कोर्ट में पेश जवाब में कहा गया कि सोनार किले और उसके आसपास नए निर्माण को रोकने की पूरी कोशिश की जा रही है। प्रारंभिक चरण में इन गतिविधियों को रोकने के लिए निर्माण के प्रत्येक प्रयास की सूचना जिला प्रशासन और नगर परिषद, जैसलमेर को दी जाती है, लेकिन जिला प्रशासन और नगर परिषद इन अवैध निर्माणों को रोकने के लिए कार्रवाई करने में विफल रहे, जिसके चलते ऐसे निर्माणों की संख्या में वृद्धि हुई।08:11 PM
Published on:
28 May 2024 08:32 pm
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