
भीषण गर्मी के बीच शहर में बिजली संकट ने आमजन और कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार और अचानक हो रही कटौती से दिनचर्या प्रभावित हो रही है, वहीं बाजारों की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी है। तेज तापमान के चलते कूलर, एसी और पंखों की जरूरत बढ़ी है, लेकिन अनियमित बिजली आपूर्ति ने राहत की उम्मीद को कमजोर कर दिया है। शहर के कई क्षेत्रों में प्रतिदिन 3 से 6 घंटे तक बिजली बाधित रहने की स्थिति बन रही है। अचानक कटौती से घरेलू कामकाज, पानी की सप्लाई और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बाजारों में दुकानदारों को ग्राहकों के सामने असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बिलिंग, डिजिटल भुगतान और अन्य तकनीकी कार्य रुक-रुक कर चल रहे हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
बिजली संकट का सीधा असर खर्च पर भी दिख रहा है। इनवर्टर और जेनरेटर का उपयोग बढ़ने से आर्थिक बोझ बढ़ गया है। एक मध्यम आकार के प्रतिष्ठान को जेनरेटर चलाने पर प्रतिदिन 800 से 1500 रुपए तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। घरों में भी इनवर्टर बैटरी की देखभाल और चार्जिंग का खर्च बढ़ गया है। तकनीकी जानकारों के अनुसार गर्मी के साथ बिजली की मांग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। मौजूदा ढांचा इस बढ़ी मांग को संभालने में सक्षम नहीं दिख रहा। ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने और लाइनों में फॉल्ट की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई क्षेत्रों में पुराने उपकरण समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। बिजली पर निर्भर जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है। मोटर नहीं चल पाने से पानी की किल्लत बढ़ रही है, जिससे लोगों को टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इससे अतिरिक्त खर्च और परेशानी दोनों बढ़ रहे हैं।
-प्रतिदिन 3 से 6 घंटे तक कई क्षेत्रों में बिजली कटौती
-गर्मी में बिजली मांग 20-30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
-जेनरेटर संचालन पर 800 से 1500 रुपए तक दैनिक खर्च
-ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड और तकनीकी फॉल्ट की घटनाओं में बढ़ोतरी
ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. आरके शर्मा के अनुसार यह स्थिति केवल मौसमी दबाव नहीं बल्कि ढांचे की सीमाओं का परिणाम है। गर्मी में मांग तेजी से बढ़ती है, लेकिन वितरण तंत्र में समय पर विस्तार नहीं होने से संकट गहराता है। पुराने ट्रांसफॉर्मर, जर्जर लाइनें और सीमित बैकअप व्यवस्था मुख्य कारण हैं। समाधान के लिए फीडर अपग्रेड, नए ट्रांसफॉर्मर की स्थापना और प्रभावी लोड मैनेजमेंट जरूरी है। साथ ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम की जा सकती है। समय रहते सुधार नहीं किए गए तो आने वाले समय में ऐसे हालात और अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं।
Published on:
03 May 2026 08:52 pm
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