खरीफ सीजन में रेगुलेशन जारी हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जैसलमेर ज़ोन की नहरों में न सिंचाई पानी पहुंचा है और न ही पेयजल की समस्या का समाधान हुआ है।
खरीफ सीजन में रेगुलेशन जारी हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जैसलमेर ज़ोन की नहरों में न सिंचाई पानी पहुंचा है और न ही पेयजल की समस्या का समाधान हुआ है। इस स्थिति से गुस्साए किसानों ने शनिवार को इंदिरा गांधी नहर परियोजना कार्यालय पहुंचकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र समाधान की मांग की। ज्ञापन में किसानों ने कहा कि 21 मई को खरीफ का रेगुलेशन जारी किया गया, लेकिन आज तक जैसलमेर ज़ोन की नहरें पूरी तरह सूखी पड़ी हैं, जबकि अन्य ज़ोन में प्लस पानी की आपूर्ति हो रही है। इसे किसानों ने घोर अन्याय और भेदभावपूर्ण रवैया करार दिया। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि इस तरह का सौतेला व्यवहार अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों ने ज्ञापन में यह भी बताया कि जोन में चल रही सामूहिक डिग्गी निर्माण योजना अधूरी पड़ी है और कई डिविजनों में काम अधर में लटका हुआ है। उन्होंने डिग्गियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करवाकर इनलेट बनवाने और पूर्ण डिग्गियों के लिए सोलर पंप के आवेदन विभाग से करवाने की मांग रखी।
पिछली बजट घोषणाओं के बावजूद सीएडी खालों का जीर्णोद्धार और मरम्मत का कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही ईआरएम योजना के अंतर्गत वितरिकाओं और माइनरों के मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की बात कही गई। किसानों ने यह भी बताया कि वर्कचार्ज कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विभाग ने ठेकेदारों को जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन उनके कर्मचारियों की कथित मनमानी से जल वितरण को प्रभावित हो रही है। इससे न केवल नहरों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, बल्कि पानी के दुरुपयोग की संभावना भी बढ़ गई है। उन्होंने मांग की कि हर हेड की जिम्मेदारी संबंधित कनिष्ठ अभियंता को सौंपी जाए। आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों ने आग्रह किया कि रेगुलेशन से पहले नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य पूर्ण करवा लिया जाए, ताकि समय पर सिंचाई हो सके और बारियां न पिटें। ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में प्रांत महामंत्री विजयसिंह घिटाला, जिला अध्यक्ष वैणसिंह राठौड़, कवराजसिंह रामगढ़, साहबानखान, हाथीसिंह, कमलसिंह मोहनगढ़, कुलदीपसिंह सरपंच, लुणसिंह, नगा, किसनाराम, कैलाश रिणवाक्ष, अलादीन खान सहित कई किसान शामिल रहे।