
जैसलमेर के ह्रदयस्थल गोपा चौक से सब्जी मंडी को मंगलसिंह पार्क के पिछले हिस्से में स्थानांतरित करने का काम पूरा हो गया है। गत मंगलवार रात को ही नगरपरिषद की जेसीबी के पीले पंजों ने सब्जी मंडी में बनी चौकियों व चारदीवारी के ढांचे को जमींदोज कर दिया। रात में ही वहां से सारा मलबा हटवा दिया गया, अब यह स्थान पूरी तरह से खाली हो गया है। जिससे गोपा चौक का यह हिस्सा एकदम से खाली-खाली नजर आने लगा है। नगरपरिषद आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा ने बताया कि आने वाले समय में भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग (एएसआइ) की ओर से हटाई गई सब्जी मंडी से लगती किले की प्राचीन दीवार की मजबूती के लिए काम शुरू करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि एएसआइ की ओर से दुर्ग की प्राचीर को सुदृढ़ करने के लिए सब्जी मंडी के स्थानांतरण का अनुरोध किया गया था। नगरपरिषद आयुक्त लजपालसिंह ने बताया कि एएसआइ की ओर से दीवार का काम पूरा करने के बाद खाली करवाए गए स्थान में फर्श निर्माण का कार्य हो सकेगा।
गोपा चौक सब्जी मंडी के स्थानांतरण के बाद इस स्थान का नजारा पूरी तरह से बदल गया है। पिछले 30 साल से अधिक समय से करीब 1500 वर्गफीट क्षेत्रफल में मंडी का संचालन हो रहा था। अब सब्जी विक्रेता मंगलसिंह पार्क के पीछे वाले हिस्से में अपना कामकाज शुरू कर चुके हैं। शहरवासियों के बीच गोपा चौक क्षेत्र के इस विस्तृत हुए इलाके को देखने के प्रति दिलचस्पी देखी गई।
जैसलमेर. इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत जैसलमेर जिले के रामगढ़ क्षेत्र स्थित तनोट वितरिका पर चल रहे ईआरएम कार्यों का बुधवार को निरीक्षण किया गया। जल संसाधन विभाग राजस्थान, जयपुर के अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य अभियन्ता अमरजीत सिंह मेहरड़ा ने राज्य सरकार के निर्देशानुसार यह अवलोकन किया। इसका उद्देश्य कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और अंतिम छोर तक पानी की सुचारु आपूर्ति बनाए रखना है। निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता आरके मीणा, अधीक्षण अभियन्ता मधुसूदन रजोत, अधिशाषी अभियन्ता सुनील, संबंधित संवेदक और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का अवलोकन किया। अतिरिक्त सचिव मेहरड़ा ने संवेदकों एवं फील्ड अभियन्ताओं को कार्यों को उच्च गुणवत्ता तथा निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आगामी ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों में तराई (क्योरिंग) की प्रक्रिया का विशेष ध्यान रखने को कहा, ताकि संरचनाओं की मजबूती और दीर्घायु सुनिश्चित हो सके।
Published on:
08 Apr 2026 08:37 pm
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