
जुरासिक काल के आसपास हुआ था जैसलमेर का विकास, तब बहुतायत थे डायनासोर
जैसलमेर. सरहदी जिले के समीप गजरूप सागर क्षेत्र में मिला अंडे का जीवाश्म इन दिनों सुर्खियों में हैं। पहाड़ी में मिला ‘एग फॉसिल’ डायनासेार के अंडे होने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही एक बार फिर सरहदी क्षेत्र जैसलमेर में लाखों वर्ष पहले डायनासोर का विचरण होने के प्रमाणों में एक और कड़ी जुड़ गई है। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वे ओर आइआइटी की टीम ने इसी क्षेत्र में डायनासोर के जीवाश्म खोजे थे। भू-वैज्ञानिक डॉ. नारायणदास इणखिया बताते हैं कि डायनासोर जैसे जीव भू-वैज्ञानिक कालक्रम के मीजोजोइक कालक्रम के जुरासिक पीरियड में बहुतायत से थे। यह समय काल लगभग 150 से 200 लाख वर्ष पूर्व का माना जाता है। दरअसल, जैसलमेर के आसपास की भूमि का विकास भी इसी जुरासिक काल में हुआ था। यह वह काल थाए जब विश्व भर में नमी भरा वातावरण था तथा घने जंगल थे। इसी काल में डायनासोर जैसे विशालकाय जीव भी थे। जुरासिक काल से संबंध होने से ही यहां डायनासोर जैसे जीवो के लिए अनुसंधान होते रहे है। थइयात के पास मिले थे डायनासोर के फुटप्रिंट वर्ष 2015 में जैसलमेर में यूरोपियन यूनियन के वैज्ञानिकों ने जुरसिक कांग्रेस का आयोजन किया था। वैज्ञानिकों ने थइयात के पास डायनासोर के फुट प्रिंट्स रिपोर्ट तैयार की थी। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वे व रूडक़ी के शोधर्थियों ने जेठवाई रोड के सहारे इन्ही डायनासोर के हड्डियों के जीवश्म रिपोर्ट किए थे। अनुसंधान में सामने आ रहे रहस्य
देश-दुनिया में इस प्रकार के अनुसंधान जहां भी हुए है, वे स्थान आज सुरक्षित है। आज भी ये स्थान पृथ्वी व जीवन को समझने के काम आ रहे है। कई स्थान आज टूरिस्ट स्पॉट है और देश विदेश के लोग यहां पहुंचते हैं, लेकिन हकीकत यह भी है कि बढ़ते अतिक्रमणों, आवासीय योजनाओं ओर खनन से ये जैसलमेर की ये पूरा धरोहरें समाप्त हो रही है।
अनुसंधान में मिलेगी मदद
गजरूपसागर क्षेत्र में मिला एक फॉसिल अनुसंधान का विषय है। भू-वैज्ञानिक कालक्रम के अनुसार डायनासोर या उस काल खंड के किसी जीव का यह एग जीवाश्म हो सकता है। इन सबके बीच विद्यार्थियों के लिए यह लाखों वर्ष पहले रहस्यों को जानने में यह मददगार साबित हो सकता है।
-निशा इणखिया, छात्रा
Published on:
12 Sept 2023 05:35 pm
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