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पारम्परिक रूप से मनाया जैसलमेर का 870वां स्थापना दिवस

स्वर्णनगरी के नाम से दुनिया भर में मशहूर जैसलमेर का 870वां स्थापना बुधवार को पारम्परिक रूप से मनाया गया।

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स्वर्णनगरी के नाम से दुनिया भर में मशहूर जैसलमेर का 870वां स्थापना बुधवार को पारम्परिक रूप से मनाया गया। प्रात:कालीन कार्यक्रमों में जैसलमेर दुर्ग पर कुलदेवी मां स्वांगिया की पूजा-अर्चना की गई और महारावल पैलेस के स्वांगिया चौक में गायत्री यज्ञ का आयोजन हुआ। बाद में दुर्ग स्थित महल की छत पर रियासतकालीन ध्वज का मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया गया। इस अवसर पर पूर्व राजघराने के सदस्यों दुष्यंत सिंह, विक्रमसिंह नाचना, जनकसिंह दूदू, हरिवल्लभ गोपा, पंडित नन्दकिशोर, पैलेस म्यूजियम के निदेशक देवेन्द्र प्रताप सिंह ने आहुतियां दी। स्थापना दिवस पर सोनार दुर्ग में लोक कलाकारों ने लोक गीतों की प्रस्तुतियां दी। आलमखाना के संगीतकार हसन खान व उनके परिवार के सदस्यों ने जैसलमेर के लोक गीतों से इतिहास की व्याख्या की। जैसलमेर स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बधाई दी। उन्होंने एक्स पर संदेश में स्वर्णनगरी जैसलमेर के स्थापना दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तनोट माता जी की असीम कृपा से यह जिला सदैव विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहे। समस्त नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो। गौरतलब है कि जैसलमेर के सोनार दुर्ग की स्थापना राजा जैसलदेव ने 1156 को सावन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को की थी। उसी तिथि से नगर का स्थापना दिवस मनाया जाता है।