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करणी सेना ने काला दिवस मनाकर किया प्रदर्शन

- जुलूस निकालकर राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन

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करणी सेना ने काला दिवस मनाकर किया प्रदर्शन

करणी सेना ने काला दिवस मनाकर किया प्रदर्शन

पोकरण. राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से शुक्रवार को देशभर में काला व धोखा दिवस मनाते हुए जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी को सुपुर्द कर सीबीआई की ओर से दर्ज किए गए झूठे मुकदमों को वापिस लेने की मांग की है। करणी सेना की एक बैठक स्थानीय राजपूत छात्रावास में आयोजित की गई। इस मौके पर संबोधित करते हुए करणी सेना के जिलाध्यक्ष सांगसिंह गड़ी ने बताया कि गत दो वर्ष पूर्व पुलिस की ओर से आनंदपालसिंह का एनकाउंटर किया गया था। एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग को लेकर करणी सेना सहित अन्य संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि सीबीआई को जांच एनकाउंटर की करनी थी, जबकि सीबीआई की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 24 लोगों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कर दिए गए। जिससे देशभर में समाज के लोगों में रोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि गत 17 जुलाई 2018 को ही समझोतावार्ता हुई थी। जिसके अंतर्गत आनंदपालसिंह का शव उठाया गया था। उस समझोतावार्ता में एनकाउंटर की सीबीआई से जांच करवाने की मांग पर सहमति बनी थी। जबकि एनकाउंटर की जांच नहीं हो पाई और समाज के लोगों के विरुद्ध मामले दर्ज कर दिए गए। ऐसे में आज के दिन को काला व धोखा दिवस मनाते हुए देशभर में आंदोलन किया गया।
समाज को एकजुट होने का किया आह्वान
बैठक को संबोधित करते हुए राजपूत सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष राणीदानसिंह भाटी ने समाज के लोगों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज के लोग जाति के नाम पर अलग-अलग हो रहे है। जिससे समाज पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने समाज के युवाओं से हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से समाज के साथ धोखा करते हुए एनकाउंटर की जांच करवाने की बजाय सीबीआई से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के विरुद्ध मामले दर्ज करवाए गए है। जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार से सामाजिक नेताओं पर लगाए गए झूठे आरोपों को हटाने व मुकदमे वापिस लेने की मांग की। इस मौके पर विक्रमसिंह फौजदारों की ढाणी, कंवराजसिंह केलावा, करणी सेना अध्यक्ष विक्रमसिंह फलोदी, रूपसिंह रामदेवरा, चुतरसिंह तंवर, तनसिंह राजगढ़, रेंवतसिंह माड़वा, गणपतसिंह गड़ी, भोमसिंह भणियाणा, पूनमसिंह घंटियाली, स्वरूपसिंह छायण, दानवीरसिंह भैंसड़ा, नरेन्द्रसिंह जोधा, गोविंदसिंह भैंसड़ा, जालमसिंह ओला, जितेन्द्रसिंह फौजदारों की ढाणी, दिलीपसिंह गड़ी, महेन्द्रसिंह लूणा, डूंगरसिंह सांकड़ा, सुरेन्द्रदान बारठ का गांव, सुरेश चारण माड़वा, भीमसिंह रामदेवरा, श्रवणसिंह बामणु, जालमसिंह झलारिया, विशनसिंह गड़ी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।